भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना वन क्षेत्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें वन विभाग के एसडीओ विनोद वर्मा एक रेस्क्यू किए गए सांभर को पोहा खिलाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को एसडीओ ने खुद ही फेसबुक पर पोस्ट किया था।
कानून का उल्लंघन और विशेषज्ञों की चिंता
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ट्वीट कर इसे वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (WPA) 1972 की धारा 9 और 38J का सीधा उल्लंघन बताया है। दुबे का कहना है कि जंगली जानवरों को इंसानी भोजन खिलाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि खतरनाक भी है।
क्यों है यह गंभीर मामला?
विशेषज्ञों के अनुसार, पोहे में मौजूद नमक सांभर के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। सबसे बड़ा खतरा यह है कि इंसानी स्वाद की लत लगने के बाद जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की आशंका बढ़ जाती है। एक जिम्मेदार वन अधिकारी द्वारा ही नियमों को ताक पर रखने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद विभाग में हलचल मच गई है। खबरों के अनुसार, प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल, वन महकमा इस बात पर जवाब तलाश रहा है कि कानून के रक्षक ही नियम तोड़ने वाले कैसे बन गए।



