भोपाल:जनजातीय क्षेत्रीय विकास परियोजना (TADP) की संचालक और कई निगमों की एमडी IAS नेहा मराव्या की कार्यप्रणाली के खिलाफ शुक्रवार को 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी सड़क पर उतर आए। कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और ‘पेन डाउन’ कर काम पूरी तरह ठप रखा।
मुख्य आरोप और विवाद:
- बदसलूकी और धमकी: अधिकारियों का आरोप है कि एमडी द्वारा बैठकों में अपमानित किया जाता है, इंक्रीमेंट रोके जा रहे हैं, बार-बार नोटिस दिए जाते हैं और सस्पेंड करने की धमकियां दी जा रही हैं।
- मीटिंग से भगाने का आरोप: अपर आयुक्त संजय वार्ष्णेय के अनुसार, एक बैठक के दौरान दो महिला अपर संचालकों को डांटकर मीटिंग रूम से बाहर भगा दिया गया।
- अव्यावहारिक मांगें: कर्मचारियों का आरोप है कि 40 से 50 साल पुराने रिकॉर्ड और माप पुस्तिका की जानकारियां महज 3 घंटे के भीतर या एक कार्य दिवस में मांगी जाती हैं। ऐसा न होने पर नोटशीट में प्रतिकूल टिप्पणियां की जाती हैं।
- आहार अनुदान राशि अटकी: अपर संचालक रीता सिंह ने बताया कि बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय की करीब 2.40 लाख महिलाओं को मिलने वाली अगस्त माह की करीब 30 करोड़ रुपए की राशि अब तक खातों में नहीं पहुंची है।
आयोग और संघ ने खोला मोर्चा
- ST आयोग का पत्र: मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पीएम-जनमन योजना, वित्तीय पारदर्शिता और PVTG क्षेत्रों में खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
- राजपत्रित अधिकारी संघ की आपत्ति: संघ ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अनावश्यक दबाव बनाने और कार्यालय समय के बाद कर्मचारियों को रोकने के निर्देश वापस लेने की मांग की है।




