भोपाल। राजधानी की शान ‘बड़ा तालाब’ को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। सोमवार को प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ सेवनिया और गौरा गांव में बड़ी कार्रवाई की। तालाब के कैचमेंट एरिया में अवैध रूप से बनाई गई बाउंड्रीवॉल और पक्के निर्माणों को जेसीबी की मदद से ढहा दिया गया।
एसडीएम अर्चना शर्मा और तहसीलदार कुणाल रावत की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि तालाब के संरक्षण से कोई समझौता नहीं होगा।
अगले 15 दिन का ‘एक्शन प्लान’
प्रशासन ने तालाब के चारों ओर कुल 347 अतिक्रमण चिन्हित किए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 16 मार्च 2022 (भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने की तिथि) के बाद जितने भी निर्माण हुए हैं, उन्हें पूरी तरह हटाया जाएगा। नियम के अनुसार, तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है।
कहाँ और कब होगी अगली कार्रवाई?
प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए विस्तृत शेड्यूल जारी किया है:
- 15-16 अप्रैल: बैरागढ़ क्षेत्र में मकान और मैरिज गार्डन पर चलेगा बुलडोजर।
- 17 अप्रैल: हुजूर तहसील की सरकारी भूमि पर कार्रवाई।
- 18-19 अप्रैल: टीटी नगर वृत्त के शेष अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
- 20-21 अप्रैल: बैरागढ़ और हुजूर तहसील में अंतिम दौर का अभियान।
विवादों के घेरे में वन विहार और मैरिज गार्डन
जांच में सामने आया है कि टीटी नगर के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अवैध कब्जे हैं। वहीं, वन विहार नेशनल पार्क के पास भी करीब 2.5 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण की बात सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये निर्माण वेटलैंड नियमों का खुला उल्लंघन हैं।
NGT जा सकता है मामला
तालाब के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए पर्यावरणविद् भी सक्रिय हो गए हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर के अनुसार, यह मामला बेहद गंभीर है और वे इस अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मुद्दे को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार का नजरिया: प्रशासन की यह मुहिम स्वागत योग्य है, लेकिन चुनौती उन रसूखदारों पर कार्रवाई करने की है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर तालाब की छाती पर कंक्रीट का जाल खड़ा कर दिया है। देखना होगा कि क्या 15 दिन में भोपाल का यह ‘बड़ा दिल’ सच में साफ हो पाएगा?




