भोपाल। राजधानी के अयोध्या बायपास को अत्याधुनिक 10 लेन मार्ग में बदलने की कवायद तेज हो गई है, लेकिन विकास की इस चमक के बीच ‘विस्थापन’ का अंधेरा गहराने लगा है। नेशनल हाईवे-146 पर आशाराम तिराहा से रत्नागिरी तिराहे तक बनने वाली इस 16 किलोमीटर लंबी सड़क की जद में अब केसर बस्ती की करीब 90 झुग्गियां आ गई हैं। प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए नोटिस तो थमा दिए हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके सिर की छत का है।
प्रोजेक्ट की बड़ी बातें: क्या-क्या हटेगा?
सड़क चौड़ीकरण और आनंद नगर में प्रस्तावित फ्लाईओर के निर्माण के लिए प्रशासन अब तक कड़े कदम उठा चुका है:
- दुकानें: सड़क किनारे की 146 दुकानें पहले ही जमींदोज की जा चुकी हैं।
- सार्वजनिक भवन: एक वार्ड कार्यालय और एक पुलिस चौकी को शिफ्ट करने की तैयारी है।
- धार्मिक स्थल: तीन धार्मिक स्थलों को भी मार्ग से हटाया जाना है।
- केसर बस्ती: यहां के करीब 90 परिवारों को घर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
50 साल पुराना आशियाना, अब भविष्य धुंधला
केसर बस्ती के निवासियों का कहना है कि वे यहाँ पिछले 50 वर्षों से रह रहे हैं। अचानक मिले नोटिस से बस्ती में डर का माहौल है। रहवासियों का आरोप है कि प्रशासन उन्हें हटाने की जल्दी में तो है, लेकिन उनके पुनर्वास (रहने की वैकल्पिक व्यवस्था) और उचित मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उनका सीधा सवाल है—”बिना छत दिए हमें बेघर क्यों किया जा रहा है?”
सियासत भी गरमाई: ‘पहले घर दो, फिर घर तोड़ो’
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रभावितों से मुलाकात की। कांग्रेस नेता रविंद्र साहू झूमरवाला, मोहित सक्सेना और रीतेश सोनी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। - रविंद्र साहू ने दो टूक शब्दों में कहा, “विकास जरूरी है और हम उसके खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास गरीबों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। प्रशासन को पहले इन 90 परिवारों के रहने का इंतजाम करना चाहिए, उसके बाद ही विस्थापन की कार्रवाई हो।”
आगे क्या?
फिलहाल बस्ती के लोग और विपक्षी दल एकजुट होकर पुनर्वास की मांग पर अड़े हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन विकास की रफ्तार बरकरार रखने के लिए इन परिवारों को सुरक्षित स्थान मुहैया कराता है या टकराव की स्थिति पैदा होगी।



