भोपाल की सड़कों पर दौड़ने वाली सिटी बसों के टिकट कलेक्शन पर फिर सवाल खड़े हुए हैं। एक यात्री ने टिकट कलेक्शन में गड़बड़ी को उजागर करते हुए वीडियो बना लिया। यात्री ने बस कंडक्टर से पूछा कि किराया ले रहे, लेकिन टिकट क्यों नहीं दे रहे? जवाब में कंडक्टर ने कहा कि मशीन खराब है। ऐसे में टिकट कलेक्शन राशि में गड़बड़ी सामने आई है। इसकी शिकायत भी निगम अधिकारियों से की गई है।
यात्री और कंडक्टर के बीच बातचीत का 47 सेकंड का वीडियो भी सामने आया है। सिटी बस रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से कटारा की जा रही थी। तभी यात्री कंडक्टर से टिकट मांगता है, लेकिन मशीन खराब होने के बहाने टिकट नहीं दी जाती है, जबकि किराया ले लिया जाता है। इस पर सवारी ने ही वीडियो बनाया। जिसमें वो कह रहा है कि पूरी बस भरी है। कंडक्टर ने किसी को टिकट नहीं दिया है। क्यों नहीं दिया, यह सवाल है। सवाल पर कंडक्टर ने कहा कि मशीन ही काम नहीं कर रही है। इस पर यात्री ने शिकायत करने की बात कही। शाम तक निगम अफसरों तक शिकायत भी पहुंच गईं।

दो तरह से गड़बड़ी मशीन के जरिए टिकट नहीं दिए जाने पर दो तरह की गड़बड़ी सामने आ रही है। पहली कि कंडक्टर निर्धारित से ज्यादा यात्रियों से किराया वसूले और दूसरा संबंधित बस एजेंसी को पूरी राशि नहीं दें। ऐसे में आगे चलकर एजेंसी संचालक नुकसान का हवाला दें और नगर निगम से रियायत मांगें। इस तरह गड़बड़ी की वजह से यात्री और निगम पर आर्थिक बोझ आ रहा है।
भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बुरे हाल बता दें कि भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बुरे हाल है। एक समय कुल 368 बसें सड़कों पर दौड़ रही थी, लेकिन बाद में बसें बंद होने लगी और अब इनकी संख्या 60 पर आ गई। कुछ दिन पहले ही 16 नई सीएनजी बसें चलने लगी, लेकिन यह काफी नहीं है।
टिकट कलेक्शन के चलते ही बंद हो चुकी हैं बसें
डेढ़ साल पहले तक भोपाल में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में सिटी बसों का संचालन BCLL के जरिए 4 एजेंसी कर रही थी। इनमें मां एसोसिएट्स, एपी मोटर्स, श्री दुर्गांबा और आई-मोबिलिटी एजेंसी शामिल हैं। ये एजेंसियां 25 रूट पर बसें चला रही थी। इनमें से सबसे पहले पिछले साल 4 जुलाई को मां एसोसिएट्स ने 149 बसों का संचालन बंद किया था।
इसकी वजह इन बसों में टिकिट कलेक्शन करने वाली एजेंसी ‘चलो एप’ की ओर से प्रति किमी दी जाने वाली राशि घटाने की मांग है, लेकिन डेढ़ साल बाद भी बीसीएलएल और निगम के जिम्मेदार इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पाए। इसके बाद अन्य एजेंसियों की बसें भी बंद होने लगी और संख्या 368 से घटकर 60 पर आ गई।
चलो ऐप विवाद के बाद बसें बंद कर दी गईं
चलो ऐप टिकट कलेक्शन एजेंसी थी, जिसे प्रति किलोमीटर राशि 33 रुपए देना था, लेकिन आमदनी 20 से 22 रुपए आ रही थी। इस राशि को कम करने की मांग उठ रही थी। बस ऑपरेटर और चलो ऐप में इस राशि को लेकर विवाद की स्थिति बनी। इसके बाद धीरे-धीरे बसें बंद कर दी गईं।




