भोपाल के दो डॉक्टरों ने अपनी फिटनेस और अनुशासन के दम पर दुनिया की सबसे कठिन ट्रायथलॉन रेसों में से एक ‘आयरन मैन’ प्रतियोगिता पूरी कर ली। करीब 7 घंटे 30 मिनट में 1900 मीटर तैराकी, 90 किलोमीटर साइकिलिंग और 21 किलोमीटर दौड़ पूरा कर दोनों ने साबित किया कि डॉक्टरों की व्यस्त दिनचर्या के बावजूद फिटनेस के लिए समय निकाला जा सकता है।

इस रेस में भोपाल की वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर प्रदेश की एकमात्र महिला डॉक्टर रहीं, जिन्होंने लगातार दूसरी बार यह चुनौती पूरी की। वहीं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्र प्रकाश ने पहली बार हिस्सा लिया और बेहतरीन प्रदर्शन किया।
बता दें गोवा में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 32 देशों के 1200 से अधिक प्रतिभागी शामिल थे।
प्रदेश की अकेली महिला डॉक्टर वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने बताया कि इस स्तर की तैयारी उनके लिए बेहद कठिन थी। वह रोज सुबह 4 बजे उठकर प्रैक्टिस करने निकल जातीं। एक दिन में दो इवेंट की ट्रेनिंग स्विमिंग-रनिंग, रनिंग-साइकिलिंग, या साइकिलिंग-स्विमिंग करती थीं। सुबह 8 बजे अस्पताल और शाम 6:30 बजे लौटकर परिवार के लिए समय निकालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

बेटियों के साथ की प्रैक्टिस रेडियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्र प्रकाश ने पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लिया और शानदार समय में रेस पूरी की। वे अपनी दो बेटियों के साथ एक साल से लगातार ट्रेनिंग कर रहे थे। उनकी बेटियों ने आयरन मैन इवेंट की ‘किड्स कैटेगरी’ में हिस्सा लिया।
क्या है हाफ आयरन मैन हाफ आयरन मैन विश्व की सबसे कठिन ट्रायथलॉन रेसों में से एक है। इसमें प्रतिभागियों को कुल 113 किमी दूरी तय करनी होती है। जिसमें 1.9 किमी तैराकी, 90 किमी साइकिलिंग और 21.1 किमी दौड़ होती है। ये रेस न केवल शारीरिक क्षमता बल्कि मानसिक संतुलन और धैर्य का भी बड़ा परीक्षण है।
फुल आयरन मैन और भी मुश्किल फुल आयरन मैन प्रतियोगिता इससे दोगुनी दूरी की होती है। इसमें 3.8 किमी तैराकी, 180.2 किमी साइकिलिंग और 42.2 किमी दौड़ लगानी पड़ती है। इसे 16 घंटे के अंदर पूरा करने वाले को ही ‘Iron man’ कहा जाता है।
मिलिंद सोमन हैं आयरन मैन चैंपियन
भारत में आयरन मैन प्रतियोगिता को लोकप्रियता उस समय मिली जब मिलिंद सोमन ने 2015 में ज्यूरिख ट्रायथलॉन पूरा किया था। उन्होंने 15 घंटे 19 मिनट में फुल आयरन मैन रेस पूरी की थी।
दोनों डॉक्टरों की उपलब्धि क्यों खास
- मध्यप्रदेश में इतने कठोर इवेंट को पूरा करने वाले डॉक्टर बेहद कम हैं।
- दोनों डॉक्टर प्रतिदिन 10–12 घंटे अस्पताल में काम करने के बावजूद फिटनेस के लिए समय निकालते रहे।
- प्रदेश की एकमात्र महिला डॉक्टर के रूप में डॉ. प्रिया की उपलब्धि मोटिवेशनल है।
- दोनों का प्रदर्शन युवाओं, प्रोफेशनल्स और महिलाओं के लिए बड़ा संदेश है कि स्वास्थ्य और अनुशासन जीवन बदल सकता है।




