भोपाल। राजधानी में पुलिस की कार्यप्रणाली और मुस्तैदी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना कजलीखेड़ा क्षेत्र के बैरागढ़ चिचली में देर रात बदमाशों ने फायरिंग कर दहशत फैला दी। लेकिन जब खौफजदा पीड़ित मदद मांगने थाने पहुंचा, तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट लिखने के बजाय उसे डांटकर भगा दिया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, घटना रात करीब 3 बजे की है। बैरागढ़ चिचली इलाके में दो हथियारबंद बदमाशों ने फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। इसके बाद बदमाशों ने स्थानीय निवासी अजय बैरागी के घर का दरवाजा भी जोर-जोर से खटखटाया। गनीमत रही कि अजय ने अंदर से दरवाजा नहीं खोला, अन्यथा रात के अंधेरे में कोई बड़ी जनहानि या अनहोनी हो सकती थी।
पुलिस की घोर लापरवाही और उदासीनता
गोलीबारी की इस घटना से डरा-सहमा फरियादी अजय बैरागी तुरंत मदद की आस में कजलीखेड़ा थाने पहुंचा। पुलिस सूत्रों और फरियादी के अनुसार, वहां पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक था। पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया। सूत्रों का कहना है कि थाने की टीआई (TI) मैडम ने फरियादी से कहा, “रात को डिस्टर्ब मत करो, दोपहर 12 बजे थाने आना।” यह कहकर उसे थाने से चलता कर दिया गया।
सिस्टम पर उठते सवाल
एक तरफ वरिष्ठ अधिकारी 24 घंटे पुलिस गश्त और जनता की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ रात 3 बजे फायरिंग जैसी गंभीर घटना पर एक थाना प्रभारी का यह गैर-जिम्मेदाराना जवाब पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है।
- बड़ा सवाल: अगर रात के समय शहर में बदमाश बेखौफ होकर गोलियां चला रहे हैं और पुलिस नींद खराब होने का हवाला देकर पीड़ितों को भगा रही है, तो आम आदमी अपनी सुरक्षा के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाए?
अब देखना यह है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर लापरवाह पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।



