भोपाल मंडीदीप के एक स्क्रैप कारोबारी से हर महीने दो लाख रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए सेंट्रल जीएसटी के प्रिवेंटिव सुपरिंटेंडेंट राजेश कुमार गुप्ता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) भोपाल ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ दूसरी एफआईआर दर्ज कर ली है। यह नया केस मंडीदीप के स्क्रैप कारोबारी मुबीन खान की शिकायत पर 22 अक्टूबर को दर्ज किया गया है, जिसमें 15 और 16 सितंबर की घटना का जिक्र है।
एफआईआर के मुताबिक, 15 सितंबर को आष्टा से एल्युमिनियम स्क्रैप भरकर आ रही गाड़ी को जीएसटी टीम ने सीहोर टोल नाके पर रोक लिया था। इसके बाद वाहन को भोपाल के अरेरा हिल्स स्थित जीएसटी कार्यालय में खड़ा कराकर ड्राइवर और क्लीनर को बैठा लिया गया। उसी रात सुपरिंटेंडेंट राजेश कुमार अपनी टीम के साथ कारोबारी के मंडीदीप स्थित गोदाम पहुंचे और मामला रफा-दफा करने के एवज में 15 लाख रुपए की मांग की। बाद में 11 लाख रुपए पर सहमति बनी, जिसे 16 सितंबर को कारोबारी के रिश्तेदार ने चूनाभट्टी चौराहे के पास आनंद मिश्रा नाम के व्यक्ति को सौंप दिया। इसके अलावा उसी दिन जीएसटी पोर्टल पर 2.03 लाख रुपए का जुर्माना भी जमा कराया गया था। 18 सितंबर को अधिकारी द्वारा गाड़ी छोड़ने के लिए फिर से धमकाने पर कारोबारी ने सीबीआई एसपी से लिखित शिकायत की थी।
गौरतलब है कि सीबीआई ने इसी कारोबारी की शिकायत पर 10 अक्टूबर को होशंगाबाद रोड पर सुपरिंटेंडेंट राजेश कुमार को दो लाख रुपए की मासिक रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद भोपाल और कानपुर स्थित उनके ठिकानों पर छापेमारी में 72.50 लाख रुपए नकद और भारी संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए थे। विभाग इस आरोपी अधिकारी को पहले ही निलंबित कर चुका है।




