इंदौर। इंदौर की फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में अमेरिका के बर्मिंघम में रह रहे भारतीय मूल के एक डाटा एनालिस्ट को अपनी पत्नी को हर महीने 50 हजार रुपये भरण-पोषण (मेंटेनेंस) देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पति को पिछले ढाई साल की बकाया राशि के रूप में 15 लाख रुपये एकमुश्त चुकाने और 20 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर देने के लिए भी कहा है।
क्या है मामला?
वर्ष 2010 में शादी के बाद पति अमेरिका जाकर बस गया था। पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट केपी माहेश्वरी व प्रतीक माहेश्वरी ने कोर्ट को बताया कि पति पिछले 16 वर्षों से पत्नी से अलग रह रहा है। उसने अपना मोबाइल नंबर और पता बदलकर संपर्क तोड़ लिया था। यहाँ तक कि पिता के निधन पर भी वह भारत नहीं आया और सिर्फ वीडियो कॉल पर अंतिम दर्शन किए।
आय छुपाने की कोशिश नाकाम
सुनवाई के दौरान सामने आया कि पत्नी के पास आय का कोई साधन नहीं है और वह मायके पर निर्भर है, जबकि पति अमेरिका में अच्छी कमाई कर रहा है। पति ने कोर्ट में अपनी आय के जो दस्तावेज दिए थे, उसमें विरोधाभास पाया गया। कोर्ट ने तथ्यों को देखते हुए डॉ. कुलदीप जैन ने कहा कि पति आर्थिक रूप से सक्षम है, इसलिए उसे पत्नी को गुजारा भत्ता देना ही होगा।




