भोपाल। राजधानी भोपाल में मंगलवार को एक अनोखा और प्रदेश का पहला शैक्षणिक ‘जेन अल्फा प्रोटेस्ट’ देखने को मिला, जब रीजनल कॉलेज परिसर स्थित डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूल (DMS) के करीब 300 से 400 स्कूली बच्चे अपने संस्थान के अस्तित्व को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आए। हाथों में ‘सेव डीएमएस’ की तख्तियां लिए इन नन्हें छात्रों ने स्कूल को केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में मर्ज (संविलयन) करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया और प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
पहचान खोने का डर और प्रमुख मुद्दे:
- नवाचार की प्रयोगशाला: छात्रों का कहना है कि एनसीईआरटी के तहत 1965 से संचालित यह स्कूल केवल सामान्य शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि शैक्षणिक नवाचारों की राष्ट्रीय प्रयोगशाला है। संविलयन से इसकी मूल पहचान खत्म हो जाएगी।
- एडमिशन पॉलिसी की चिंता: अभिभावकों को डर है कि KVS की प्रवेश प्राथमिकताओं के कारण सामान्य पृष्ठभूमि के बच्चों के दाखिले पर असर पड़ेगा और नर्सरी से 12वीं तक पढ़ रहे लगभग 1,000 विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
- बिना संवाद का फैसला: अभिभावकों ने नाराजगी जताई कि इतने बड़े नीतिगत फैसले से पहले न तो उनसे संवाद किया गया और न ही व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रमों की स्थिति साफ की गई।
मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने छात्रों के आक्रोश को गंभीर बताते हुए सरकार से इस संविलयन प्रस्ताव पर तत्काल पुनर्विचार करने और स्कूल का मूल स्वरूप बरकरार रखने की मांग की है।




