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सहकारी समिति अध्यक्ष बनने से आती है लीडरशिप

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि सहकारिता की भावना का विराट स्वरूप लोकतंत्र है। सहकारी समिति का अध्यक्ष बनने वाले व्यक्ति में लीडरशिप आती है। सहकारिता में पढ़े लिखे हों या कम पढ़ें हो, सबका स्वागत है। सहकारिता सबको लेकर चलती है। इस दौरान सीएम यादव ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से युवा लोगों को नौकरी देने का काम कर सकते हैं और यही हो भी रहा है।

सीएम यादव ने ये बातें शनिवार को राजधानी के समन्वय भवन में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर सहकारी युवा संवाद के दौरान कहीं।

सीएम यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सच्चे अर्थों में न्याय करना है तो आंख पर पट्‌टी नहीं बंधी होना चाहिए। सहकारिता इसमें सहयोगी होगी। सीएम यादव ने कहा कि औद्योगीकरण के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

उन्होंने इस दौरान युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग की मौजूदगी में अतिथियों एवं युवाओं के बीच समावेशी एवं संवहनीय विकास में सहकारिता की भूमिका विषय पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में राज्य सहकारी संघ द्वारा भारत सरकार हस्तशिल्प विभाग निर्मित टूलकिट वितरण भी किया गया। यह सीएचसीडीएस स्कीम के अंतर्गत हस्तशिल्प प्रशिक्षणार्थियों को दिया गया।

सहकारिता को आत्मसात करने की जरूरत-सारंग

सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सहकारिता नए आंदोलन के रूप में लगातार आगे बढ़ रही है। अलग -अलग स्तर पर सहकारिता विकास कर रही है। जहां व्यक्ति है वहां सहकारिता है। सहकारिता रोजमर्रा की जिंदगी को सहज बनाने के लिए है। इसे जीवन में आत्मसात करना होगा तभी जीवन में बदलाव आएंगे। सहकारिता सोसायटी और रोजगार नहीं बल्कि समाज का निर्माण है।

इसके पहले कार्यक्रम के शुरुआत में एसीएस सहकारिता अशोक बर्णवाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को सहकारिता की समझ के लिए यह कार्यक्रम हो रहा है। हमारा समाज ही सहकारिता के कांसेप्ट पर बना है। सहकारिता कम्पनी या आर्गेनाइजेशन से भिन्न है। सहकारी समिति में सभी को वोट देने का बराबर का अधिकार होता है। सहकारी समिति के पंजीयन में होने वाली दिक्कतों का समाधान मुख्यमंत्री के निर्देश पर हो चुका है। आने वाले समय में मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव किए जाते रहेंगे।

छात्र-छात्राओं के सवाल, सीएम मोहन के जवाब

साक्षी- कैसे सहकारी समिति का गठन करेंगे, कर्मचारी उपेक्षा भाव रखेंगे।

सीएम मोहन- नए काम के लिए हमें अपना आत्मविश्वास मजबूत करके आना पड़ेगा। आप जब कोई काम करना चाहते हैं तो पहले उसके बारे में पूर्व से काम करने वाले लोगों से जानकारी लेना चाहिए और समझना चाहिए कि सहकारी समिति में क्या-क्या हो सकता है? अगर जानकारी नहीं है तो संबंधित व्यक्ति खुद डूबेगा और दूसरों को भी डुबाएगा। अब सरकार ने व्यवस्था तय कर दी है कि तीस दिन में समिति का रजिस्ट्रेशन हो ही जाएगा।

इंजीनियरिंग छात्र मोहन चौबे – सहकारिता को शिक्षा से जोड़ना चाहिए। पढ़ाई में इसका समावेश करें। पढ़ाई में सहकारिता जैसे विषयों का समावेश किया जाना चाहिए। एजुकेशन में सहकारिता के समावेश से छात्रों में शुरुआत से ही इसकी समझ विकसित होगी।

सीएम यादव -सहकारिता में काम करने से लीडरशिप आती है। सहकारिता की भावना का विराट स्वरूप लोकतंत्र है। सहकारी समिति का अध्यक्ष बनने वाला लीडर बनता है और फिर व्यवस्था का संचालन करता है। सहकारिता में सबका स्वागत है। सहकारिता में पढ़े लिखे हों या कम पढ़ें हो, सबका स्वागत है। सहकारिता सबको लेकर चलती है। इस दौरान संगीत सोनी ने सहकारिता के साथ टाइगर रिजर्व के अनुभव सुनाए।

वकील छात्रा वैष्णवी बोली, बेइज्जती न हो जाए

कार्यक्रम में वकालत कर रही छात्रा वैष्णवी ने सहकारिता को लेकर एक कविता सुनाई। इस पर सीएम ने कहा कि तुमने लिखी क्या तो छात्रा ने कहा कि चैटजीपीटी से ली। वैष्णवी ने कहा कि वकील झूठ बोलते हैं, ऐसा कहा जाता है पर मैंने सच बोला है। इस पर ठहाके भी लगे। वकील के रूप में छात्रा वैष्णवी का रोल करते देख सीएम ने कहा कि मैं सवाल पूछूं क्या? जवाब में छात्रा ने कहा कि नहीं बता पाई तो बेइज्जती हो जाएगी। इसके बाद सीएम ने कहा कि सास-बहू अपनी बात परिवार तक पहुंचाने के लिए बच्चों का सहारा लेते हैं।

सीएम बोले, जिप्सी तक आया टाइगर, मानो पूछने आया हो कि तुम मेरे से पूछ के आए हो क्या

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवाओं के पूछा कि कितने लोग टाइगर रिजर्व में टाइगर के आस-पास तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों को लोगों के साथ जीने की आदत हो गई है। रिजर्व एरिया में टाइगर खुले में रहते हैं लेकिन वे अनुशासन का ध्यान रखते हैं। जियो और जीने दो की भावना पर जीते हैं। टाइगर एक शिकार के बाद चार से पांच दिन तक उसी शिकार को खाता है। इसके बाद खुद अपना शिकार करता है। टाइगर रिजर्व में जो घूमने जाते हैं उनकी गाड़ी खुली रहती है। अपना अनुभव सुनाते हुए सीएम यादव एक बार वे रिजर्व गए तो अपनी चाल में घूमता टाइगर उनकी जिप्सी के चारों ओर घूमकर गया। सीएम ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा कि मानों वह पूछने आया हो कि तुम मेरे से पूछ के आए हो क्या? फिर वह अपनी चाल में धीरे धीरे चला गया।

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