भोपाल। राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा खुलासा सामने आया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत सरकारी अस्पतालों में तैनात 9 तथाकथित डॉक्टर फर्जी दस्तावेजों और नकली डिग्रियों के सहारे नौकरी करते पकड़े गए हैं। इनमें तीन महिला डॉक्टर भी शामिल हैं। चूनाभट्टी पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ऐसे खुला राज
एनएचएम कार्यालय से मिली शिकायत के बाद जब दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) कराया गया, तो हकीकत सामने आई। जांच में पता चला कि आरोपियों ने मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर और एडिट की गई एमबीबीएस डिग्रियों का इस्तेमाल किया था। ये रजिस्ट्रेशन नंबर असल में किसी अन्य डॉक्टर के नाम पर दर्ज थे।
5 महीने से दे रहे थे सेवाएं
आरोपियों ने जनवरी 2026 से मई तक विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दीं और वेतन भी उठाया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह है या भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर मिलीभगत की गई।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने डॉ. आकाश चंदेलकर, डॉ. मोहर सिंह, डॉ. कमल किशोर, डॉ. मोनिका, डॉ. हारून, डॉ. शांति, डॉ. सोनम, डॉ. बुद्धमान और डॉ. पवन को नामजद आरोपी बनाया है। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की चयन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।




