Sunday, April 26, 2026
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डंपर-बस ड्राइवरों की लापरवाही ने ली 9 जानें

मैहर के नादन थाना क्षेत्र में 28 सितंबर की रात करीब 11 बजे जिस जगह बस ने डंपर को पीछे से टक्कर मारी, वह थाने से महज 200 मीटर दूर है। अब तक की पुलिस जांच में हादसे में डंपर और बस ड्राइवर दोनों की ही लापरवाही सामने आई है। दोनों फरार हैं। पुलिस ने बस और डंपर को जब्त कर थाने में खड़ा करवा लिया है।

हादसे में 9 लोगों की जान चली गई थी जबकि 24 घायल हैं। 9 को अमरपाटन, 7 को मैहर सिविल हॉस्पिटल और 8 को सतना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।​​​​​​ दैनिक भास्कर ने घटनास्थल पर जाकर हादसे की वजह समझने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों से बात की तो हादसे की मुख्य तीन वजहें सामने आईं…

  • ओवर स्पीड: टाइमिंग कवर करने के लिए ड्राइवर तेज रफ्तार में बस चला रहा था। डंपर को सामने देखकर गाड़ी कंट्रोल नहीं कर सका।
  • डंपर चालक: पंक्चर होने पर आधी सड़क घेरकर डंपर खड़ा कर दिया। गाड़ी में बैक इंडिकेटर और रेडियम भी नहीं था।
  • ओवरलोडिंग: डंपर में क्षमता से दोगुनी मात्रा में पत्थर भरे थे। इससे ज्यादा जानें गई ।

आगे बढ़ने से पहले जानें हादसे के बाद का मंजर

हादसे के बाद बस के अंदर का मंजर भयानक दिखा। सीटों पर और उनके नीचे खून फैला है। चप्पलें-जूते बिखरे हैं। यात्रियों का सामान, लंच बॉक्स, दवाएं और खिलौने इधर-उधर पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अचानक हुए हादसे में किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

25 मिनट लेट थी बस, 120 की स्पीड में दौड़ा रहा था ड्राइवर

आभा ट्रैवल्स की स्लीपर कोच बस (UP72 AT 4952) अयोध्या से रीवा होते हुए नागपुर जा रही थी। इसमें 45 यात्री सवार थे। बस शनिवार दोपहर 2 बजे अयोध्या से चली और तय समय से 20 मिनट लेट 10 बजकर 20 मिनट पर रीवा पहुंची। उसे सुबह 9:30 बजे नागपुर पहुंचना था।

लंबे रूट की बस में दो ड्राइवर थे। हादसे के वक्त सेकंड ड्राइवर रोहिणी विश्वकर्मा गाड़ी चला रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस की स्पीड करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे थी।

नेशनल हाईवे 30 पर डंपर आधी सड़क घेरकर खड़ा था। स्पीड ज्यादा होने के कारण ड्राइवर बस कंट्रोल नहीं कर सका। जब तक वह कुछ समझ पाता, इससे पहले ही बस डंपर से जा टकराई।

सवारी-लगेज को लेकर मारामारी, ओवर स्पीड में चलाते हैं गाड़ियां

रीवा बस स्टैंड प्रबंधन के मुताबिक, यहां से नागपुर के लिए 50 से ज्यादा बसें चलती हैं। सभी बसों की टाइमिंग शाम 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक है। सवारी और लगेज को लेकर मारामारी रहती है। जल्दी पहुंचने के चक्कर में ड्राइवर ओवर स्पीड में गाड़ियां चलाते हैं।

डंपर में न बैक लाइट थी, न रेडियम; बस का ड्राइवर देख ही नहीं पाया

छत्तीसगढ़ पासिंग 12 पहिया डंपर (CG04 NB 6786) की क्षमता 20 टन है लेकिन उसमें करीब 40 टन पत्थर भरे थे। हादसे से एक घंटे पहले डंपर पंक्चर हो गया था। सड़क के नीचे गड्‌ढा और गीली मिट्‌टी थी। धंसने के डर से ड्राइवर ने सड़क पर ही डंपर खड़ा कर दिया।

डंपर में बैक लाइट या इंडिकेटर और रेडियम भी नहीं था, जिससे दूसरे वाहन के ड्राइवर को वह दूर से दिख सके। डंपर आधी सड़क घेरकर खड़ा था। उसका ड्राइवर गाड़ी छोड़कर 250 मीटर दूर ढाबे पर चाय पीने चला गया था। जब वह लौटकर आया, तब तक हादसा हो चुका था। घबराकर वह वहां से फरार हो गया।

डंपर जावेद मियांदाद के नाम पर, पीयूसी एक साल पहले खत्म

पुलिस के मुताबिक, डंपर जावेद मियांदाद के नाम पर है। यह 19 जुलाई 2022 को रायपुर से रजिस्टर्ड कराया गया था। 2 अगस्त 2022 को इसे परमिट मिला। 18 जुलाई 2023 को इसकी PUC खत्म हो गई थी। इंश्योरेंस 13 जून 2025 तक है।

ओवरलोडिंग इतनी कि टक्कर के बाद डंपर जरा सा खिसका

पुलिस के मुताबिक, डंपर में ओवरलोडिंग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बस की इतनी तेज टक्कर के बाद भी डंपर जरा सा खिसका था। वहीं, बस का कंडक्टर साइड का हिस्सा बुरी तरह चकनाचूर हो गया था। सबसे ज्यादा मौतें और नुकसान भी इसी साइड में हुआ।

हादसे में बस कंडक्टर लाल सिंह यादव की भी मौत हो गई। वह यूपी के प्रतापगढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र के मल्याना टोला का रहने वाला था। पुलिस का कहना है कि खाली डंपर से टक्कर होती तो इतनी जनहानि नहीं हाेती।

प्रत्यक्षदर्शी बोला- चार शव बाहर पड़े थे, अंदर मची थी चीख-पुकार

राजेश मिश्रा केजेएस कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। वे हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया, ‘बस के अंदर चीख-पुकार मची थी। थाना 200 मीटर की दूरी पर होने के कारण पुलिस भी तत्काल पहुंच गई थी। सतना से पुलिस बल पहुंचने में समय लगता। लिहाजा, हमने पुलिस के साथ मिलकर गैस कटर से बस के एक हिस्से को काटना शुरू किया ताकि जल्द घायलों को निकाला जा सके।

क्षतिग्रस्त हिस्से को काटने के बाद हम बस के अंदर पहुंच पाए। घायलों को निकालकर एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया।

पिता-भाई को खोया, अब भतीजे की भी मौत

हादसे में धीरज शुक्ला की मौत हो गई। उसके चाचा लवलेश शुक्ला ने कहा- इससे पहले ही अपने पिता और बड़े भाई को सड़क दुर्घटना में खो चुका था। अब भतीजे को भी खो दिया। इतना सब देखने के बाद अब जीने की शक्ति नहीं बची।’

लवलेश ने रुंधे हुए गले से बताया, ‘भतीजे को पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। वह प्रयागराज में एसएससी की तैयारी कर रहा था। धीरज की बहन और मां नागपुर में रहती हैं। वह उनके पास जा रहा था। जाते समय उसने बोला था कि चिंता मत करना, अच्छे से पहुंच जाऊंगा। नागपुर पहुंचकर कॉल करूंगा। चाचा अपना ख्याल रखना।’

घर का इकलौता चिराग बुझ गया

हादसे में घायल महिमा साहू ने बताया, ‘मैं जौनपुर की रहने वाली हूं। हादसे के वक्त सो रही थी। अचानक तेज झटका लगा। कुछ देर तक समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है? मेरी आंख, सिर और पैर में चोट आई है। आंख के ऊपर 6 टांके आए हैं। मेरा भतीजा शिवशंकर साहू भी घायल हुआ है।’

एक अन्य घायल सरिता साहू ने बताया, ‘मेरे ढाई साल के भतीजे गणेश साहू की हादसे में मौत हुई है। वह दो बहनों के बीच इकलौता भाई था। बड़ी मन्नतों के बाद जन्मा था। घर में सबका लाड़ला था।’

बस चालकों और संचालकों की मनमानी से होते हैं हादसे

अधिवक्ता बीके माला ने बताया कि ज्यादातर बस ड्राइवर नशे में धुत होकर गाड़ी चलाते हैं। हो सकता है कि इस बस का ड्राइवर भी नशे में हो। बस लेट भी थी। पिछले एक घंटे से डंपर खड़ा था। अन्य वाहन भी गुजरे। वैसे, स्लीपर बस की लाइट इतनी भी कमजोर नहीं होती कि सामने खड़ा इतना बड़ा डंपर नजर न आए।

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