Saturday, April 25, 2026
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ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ परशुराम संगठन

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस और बीजेपी में ओबीसी को 27% आरक्षण देने को लेकर चल रही सियासी खींचतान के बीच अब परशुराम सेवा संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह हाईकोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण पर लगाई गई अंतरिम रोक को हटाने के लिए राज्य सरकार द्वारा दायर सुप्रीम कोर्ट की याचिका का विरोध करेगा।

परशुराम सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील पांडे ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि 4 मई 2022 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर अंतरिम रोक लगाई गई थी। इस रोक को हटाने के लिए प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई 5 अगस्त को होनी है। संगठन सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करेगा कि आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को समाप्त किया जाए ताकि सभी वर्गों के साथ समान न्याय हो।

आरोप- EWS का आरक्षण 50% में नहीं जोड़ा

पांडे ने बताया कि फिलहाल राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) को 16%, अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 20%, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 14% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत सवर्णों को 10% आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ईडब्ल्यूएस का आरक्षण 50% की अधिकतम सीमा में नहीं जोड़ा गया है, जबकि ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27% करने का प्रयास संविधान पीठ द्वारा तय की गई 50% सीमा का उल्लंघन करता है।

उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि 50% से अधिक आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार को असाधारण परिस्थितियों के समर्थन में ठोस और वैध डेटा प्रस्तुत करना होगा, जो अब तक नहीं किया गया है। जब तक यह प्रमाणित नहीं होता, तब तक हाईकोर्ट की लगाई गई रोक लागू रहनी चाहिए।

सभी वर्गों को दिए जा रहे आरक्षण के अंतर को खत्म करें

परशुराम सेवा संगठन का कहना है कि वे किसी भी वर्ग के आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य सभी वर्गों को समान अधिकार और न्याय दिलाना है। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस को दिए जा रहे आरक्षण में व्याप्त सभी अंतरों को समाप्त किया जाए।

संगठन ने आरोप लगाया कि वर्तमान में कांग्रेस और भाजपा ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासी लाभ लेने की होड़ में लगी हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आरक्षण का उद्देश्य सामाजिक न्याय नहीं बल्कि राजनीतिक वोट बैंक साधना है। पांडे ने कहा कि जब तक आरक्षण की नीति में सभी वर्गों के लिए समानता नहीं लाई जाती, तब तक संगठन इसका संवैधानिक और सामाजिक स्तर पर विरोध करता रहेगा।

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