Monday, June 22, 2026
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प्राइवेट स्कूल और आरएसके का मान्यता विवाद

मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र के नए नियमों के कारण प्रदेश में 8 हजार से अधिक प्राइवेट स्कूलों की मान्यता अधर में लटकी हुई है। 10 फरवरी को मान्यता की अंतिम तिथि थी फिर भी प्रदेश के 8 हजार से अधिक स्कूलों ने इसके लिए अप्लाई नहीं किया। जिसमें भोपाल के ही 232 स्कूल शामिल है।

ऐशबाग स्थित ब्लू बेल स्कूल के संचालक और प्रदेश संचालक मंच के कोषाध्यक्ष मोनू तोमर ने बताया कि 232 स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया या फिर वो नए नियमों के आधार पर मान्यता लेने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके स्कूल में करीब 370 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल को मान्यता नहीं मिलने पर करीब 10 लाख बच्चों का भविष्य खतरे में पढ़ सकता है। ऐसे ही प्रदेशभर में करीब 8 हजार स्कूल और भी हैं जिन्होंने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है।

कहा- पेरेंट्स भी जुड़ेंगे आंदोलन से मान्यता के लिए सरकार के गाइडलाइन के नियमों के हिसाब से स्कूल की तरफ से अगर कुछ गलत डेटा दे दिया गया तो सरकार कभी भी कार्रवाई कर जेल भेज सकती है। सरकार के नियमों में स्कूलों को किसी तरह का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। अगर पुराने नियमों पर सरकार स्कूलों को मान्यता नहीं दे सकती तो कम से कम उन्हें हां या ना का विकल्प तो दिया जाए। मोनू तोमर ने कहा कि नियमों में सरकार रजिस्टर्ड किरायानामे को खत्म करें। अगर वो ऐसा नहीं कर सकती है तो कम से कम कुछ व्यवस्था करें। नहीं तो हमें 6 या 8 महीने का समय दे ताकि हम कोई व्यवस्था कर सके। अगर मान्यता नियमों में संशोधन नहीं किया गया तो इस बार सरकार का सामना बच्चों के पेरेंट्स से है। स्कूल को मान्यता नहीं मिलने पर बच्चों के पेरेंट्स सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे।

लड़ाई जारी रहेगी एल स्क्वायर पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ललिता मेवाड़ा ने कहा कि उनके स्कूल में करीब 180 बच्चे पढ़ते हैं। वहीं उन्होंने स्कूल की मान्यता के लिए आवेदन तो किया है लेकिन उसे लॉक नहीं किया है। उन्होंने कहा कि स्कूल की मान्यता की आखिरी तारीख (10 फरवरी) निकलने के बाद से 5 हजार का जुर्माना लगाया गया है। इसी के साथ अब आवेदन शुल्क 12 हजार से बढ़कर 17 हजार हो गया है। उन्होंने कहा कि हमारी चार प्रमुख मांगे है। जिसमें से 2 के लिए हम मान भी गए। लेकिन रजिस्टर्ड किरायानामा पूर्ण रूप से खत्म होना चाहिए। इसके साथ ही मान्यता के लिए पहले जैसे ही नियम रहे। इस सिलसिले में हम कोर्ट गए हैं कोर्ट के फैसले के बाद ही कुछ होगा। वहीं बच्चों की पढ़ाई पर कोई बुरा असर ना हो इसलिए अगर सरकार मान्यता के लिए तारीख बढ़ाएगी तो निश्चित रूप से मान्यता लेकर आगे की लड़ाई को जारी रखा जाएगा।

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