सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में इलाज के दौरान एक मरीज की जान जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स ने ऑपरेशन के लिए लाए गए एनेस्थीसिया इंजेक्शन को समय से पहले ही लगा दिया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
क्या है मामला?
मृतक देवेंद्र पाठक गले की गांठ के इलाज के लिए बीएमसी के ईएनटी विभाग में भर्ती थे। परिजनों के अनुसार, 13 जून को होने वाले ऑपरेशन के लिए 12 जून को एट्राक्यूरियम बेसीलेट इंजेक्शन मंगवाया गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्स शिखा पटले ने बिना डॉक्टर की सलाह के वह इंजेक्शन उसी दिन मरीज को आईवी के जरिए लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही मरीज की सांसें उखड़ने लगीं और हार्टबीट रुक गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन 23 जून को उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
ब्लूटूथ पर बात करने का आरोप
मृतक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि जिस समय नर्स इंजेक्शन लगा रही थी, वह ब्लूटूथ इयरफोन लगाकर मोबाइल पर बात करने में व्यस्त थी, जिसके कारण इतनी बड़ी चूक हुई।
नर्स निलंबित, सरकार ने दिए जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने नर्स शिखा पटले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।
सिस्टम पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक नर्स की गलती नहीं, बल्कि अस्पताल की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में बड़ी खामी है। हाई-अलर्ट दवाओं के प्रबंधन, डबल वेरिफिकेशन और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में हुई कमी की ओर भी यह मामला इशारा कर रहा है। फिलहाल पुलिस और अस्पताल प्रशासन की जांच जारी है।




