रत्न हमेशा लोगों को आकर्षित करते रहे हैं। प्राचीन मंदिरों में तो रत्नों की मूर्तियां भी देखने मिलती है। लेकिन इसे धारण करते समय सावधानी की जरूरत है। दरअसल लोग रत्नों के रंग और चमक में ऐसे मोहित हो जाते हैं कि उसे हाथ की अंगुलियों में या गले में लाकेट के साथ धारण कर लेते हैं। बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा कि इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।
मार्कण्डेय धाम तिलवारा के विचित्र महाराज बताते हैं कि रत्नों का असर राशियों के अनुसार होता है। अगर आपने अपनी राशि के अनुसार रत्नों को धारण नहीं किया तो जीवन में बुरा प्रभाव भी देखने मिलता है। यह जरूर ध्यान रखें कि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अपने ज्योतिष की सलाह जरूर लें।
पुखराज रत्न- देव गुरु बृहस्पति का रत्न पीला पुखराज है यदि पुखराज आपको लाभ नहीं कर रहा तो उसके दुष्परिणाम यह होंगे कि आपके कमर में दर्द होगा। हड्डियों में दर्द होगा। गुरु या अपने से वरिष्ठ व्यक्ति से वाद विवाद हो सकता है उनका सहयोग नहीं मिलेगा।
हीरा अथवा ओपल रत्न- शुक्र का रत्न हीरा और ओपल है इसके दुष्परिणाम के कारण आपके पेशाब में किडनी में इंफेक्शन हो सकता है। पेशाब में जलन हो सकती है या मूत्र तंत्र की पतली नसों में समस्या आ सकती है।
नीलम रत्न- शनि का रत्न नीलम है। नीलम के दुष्प्रभाव यह है कि अचानक कोई बुरी खबर मिल सकती है। आपके पैरों में चोट लग सकती है। बनते हुए काम तत्काल बिगड़ जाते हैं।
गोमेद रत्न- राहु ग्रह का रत्न गोमेद है। इसके दुष्परिणाम यह होते हैं कि व्यक्ति बहुत ही नकारात्मक सोचने लगता है। हर काम में उसको कमी दिखाई देने लगती है। डीप थिंकिंग में चला जाता है शरीर में गांठ अथवा फोड़े फुंसी पड़ सकते हैं।
लहसुनिया रत्न- केतु का रत्न लहसुनिया है। यदि लहसुनिया नहीं सूट करेगा तो इसके दुष्प्रभाव के कारण बुरे सपने आने लगते हैं। तंत्र का प्रभाव और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव हो जाता है अथवा केतु जिस स्थान पर बैठा होगा उसके दुष्परिणाम प्राप्त होंगे।
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