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मप्र के 3.50 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स को मिलेगी अतिरिक्त वेतनवृद्धि

साल 2005 से पहले 1 जनवरी से 1 जुलाई के बीच नियुक्त मध्य प्रदेश के करीब 2 लाख कर्मचारी और 1.50 लाख पेंशनरों को 5वें वेतनमान में एक वेतनवृद्धि का लाभ मिलेगा। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश वाली डबल बेंच ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सरकार को नोटिस देकर 4 हफ्ते में कर्मचारियों-पेंशनरों को वेतनवृद्धि कर 6वें वेतनमान में वेतन का निर्धारण करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी एडवोकेट जनरल को सौंपी है।

एसोसिएशन ने जबलपुर हाईकोर्ट में 5 अक्टूबर को रिट पिटिशन दायर की थी। जिस पर शुक्रवार को फैसला आया है। जिसमें कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है। याचिकाकर्ताओं ने वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार पूर्व में फिक्सेशन कर चुकी है, पर लाभ नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने तय सीमा में लाभ देने के निर्देश दिए हैं। एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी और प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने बताया कि मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के नियम 9 के अनुसार वेतनवृद्धि एक समान (1 जुलाई) करने के कारण कर्मचारियों को 6वें वेतनमान में 13 से 18 महीने बाद वार्षिक वेतनवृद्धि का लाभ मिला है।

केंद्र सरकार कर चुकी है संशोधन

यह मामला सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 6वें वेतनमान के नियम में 19 मार्च 2012 को संशोधन कर दिया। जिसमें कहा गया कि जिसकी वेतनवृद्धि 2005 में 1 जनवरी से 1 जुलाई के बीच में होती थी, उन सभी को 5वें वेतनमान में एक वेतनवृद्धि देकर 6वें वेतनमान में वेतन निर्धारण कर 1 जुलाई 2006 को वार्षिक वेतनवृद्धि दी जाए। जोशी और सक्सेना बताते हैं कि याचिका में हमने इसी बात को उठाया है।

1500 से 3200 का लाभ

सक्सेना बताते हैं कि सरकार इस प्रकरण का हाईकोर्ट के आदेश अनुसार निराकरण करती है, तो पेंशनरों को कम से कम 1500 रुपए का पेंशन और कर्मचारियों को कम से कम 3200 रुपए का वेतन में लाभ होगा

मप्र ने नहीं माने केंद्र के निर्देश

वे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ सरकारों ने भी केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए अपने कर्मचारियों का वेतन निर्धारण किया है, पर मध्य प्रदेश सरकार ने इसे नहीं माना। जोशी बताते हैं कि उन्होंने 22 मार्च 2012 को केंद्र सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए वेतनवृद्धि में सुधार के लिए ज्ञापन सौंपा था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री, प्रमुख सचिव वित्त और मुख्य सचिव ने अनुमोदित भी किया था, लेकिन आदेश जारी नहीं हुए। आखिर एसोसिएशन के अध्यक्ष आमोद सक्सेना इस मामले को लेकर हाईकोर्ट गए। सक्सेना बताते हैं कि हाईकोर्ट ने 1 हफ्ते में याचिकाकर्ताओं को निर्णय की सूचना देने और 4 हफ्ते में लाभ देने को कहा है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर के सी गिल्डीयार ने पैरवी की।

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