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असली खरीदार कौन?…:भोपाल, इंदौर समेत 4 जिलों के पंजीयकों से मांगी प्रॉपर्टी की जानकारी

परिवहन विभाग की काली कमाई से धनकुबेर बने पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौर को साथ बैठाकर पूछताछ शुरू की है। शनिवार को लोकायुक्त पुलिस की जांच टीम ने तीनों को एक साथ बैठाया तो जिन सवालों के ये अब तक अलग-अलग जवाब दे रहे थे, उन सभी सवालों पर तीनों ने चुप्पी साध ली। इनमें सोने और नकदी से लदी कार, प्रॉपर्टी में किया गया निवेश, परिवहन विभाग से कमाई का तरीका जैसे सवाल शामिल हैं।

सौरभ-चेतन कोहेफिजा, शरद शाहजहांनाबाद थाने के लॉकअप में

कई प्रॉपर्टी की पावर ऑफ अटॉर्नी दूसरें लोगों के नाम पर भी है… लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ, चेतन और शरद से पूछताछ के दौरान प्रॉपर्टी और निवेश से जुड़े दस्तावेज सामने रखे जाते हैं। लेकिन तीनों चुप्पी साध लेते हैं। लोकायुक्त ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के जिला पंजीयकों को पत्र भेजकर सौरभकी बेनामी संपत्तियों की जानकारी मांगी है।

सौरभ के यहां से मिले 50 प्रॉपर्टी के दस्तावेजों के साथ ही इनमें से कई के पावर ऑफ अटॉर्नी अन्य लोगों के नाम पर होने के दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस इन प्रॉपर्टियों के अलावा अन्य संपत्तियों की भी जानकारी निकाल रही है, ताकि भ्रष्टाचार से खरीदी गई बेनामी संपत्तियों का पूरा विवरण मिल सके।

वकील का कोर्ट में आवेदन, कहा-कस्टडी में सौरभ की जान को खतरा सौरभ शर्मा की सुरक्षा को लेकर वकील ने न्यायालय में आवेदन दिया है। वकील राकेश पाराशर ने बताया कि लोकायुक्त पुलिस कस्टडी में सौरभ की जान को खतरा है और हत्या की साजिश की आशंका है। कोर्ट ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और 4 फरवरी को सुनवाई होगी।

पाराशर ने सौरभ के साथ अमानवीय व्यवहार और सुरक्षा में चूक की बात की। लोकायुक्त पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सौरभ, चेतन और शरद को अलग-अलग थानों में रखा है। सौरभ और चेतन को कोहेफिजा, जबकि शरद को शाहजहांनाबाद थाने की लॉकअप में रखा गया है।

सौरभ, चेतन और शरद के बयानों में विरोधाभास : सौरभ ने सोने और नकदी से लदी कार के बारे में किसी भी जानकारी से इंकार किया और इसे चेतन की बताई। वहीं, चेतन का कहना है कि भले ही कार उसके नाम पर है, इसका इस्तेमाल सौरभ और उसके लोग करते थे।

शरद ने खुद को एक कर्मचारी बताकर, सौरभ के साथ प्रॉपर्टी व्यापार के संबंध की बात कही। इनकी कई प्रॉपर्टी शरद और चेतन के नाम पर भी हैं, लेकिन इन दोनों ने इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होने का दावा किया, बस यह कहा कि उनके दस्तावेज सौरभ के पास हैं और वही उनका इस्तेमाल करता है।

हवाला कनेक्शन की जांच तेज : सौरभ की गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने उसकी हवाला कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। दुबई समेत अन्य देशों में सौरभ के निवेश को खंगाला जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, परिवहन विभाग की काली कमाई हवाला के जरिए उसके भागीदारों तक पहुंचाई जाती थी।

लोकायुक्त की एफआईआर में हवाला कारोबारियों के जरिये दुबई में प्रॉपर्टी खरीदने का भी उल्लेख है। जानकारी के अनुसार, सौरभ का हवाला कनेक्शन इतना मजबूत था कि वह एक से दो घंटे में पैसे किसी भी शहर या विदेश भेज सकता था।

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