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फर्जी डोमिसाइल से GMC में सीट लेने वाला डॉक्टर दोषी

फर्जी निवास प्रमाणपत्र (डोमिसाइल) बनाकर गांधी मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल करने वाले डॉक्टर को भोपाल की अदालत ने 4 धाराओं में दोषी करार दिया है। यह फैसला 15 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है। मामले की सुनवाई भोपाल कोर्ट में चली। 27 जनवरी 2026 को 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने आरोपी को दोषी माना और सजा सुनाई है।

साल 2010 में आया था फर्जीवाड़े का केस विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अकील खान ने बताया कि यह घटना साल 2010 की है, जब आरोपी डॉक्टर सुनील सोनकर ने PMT परीक्षा पास करने के बाद मध्य प्रदेश राज्य कोटा का लाभ लेने के लिए खुद को मध्य प्रदेश का मूल निवासी बताया। इसके लिए उसने फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया। इस आधार पर उसे मेडिकल में सरकारी सीट मिल गई।

उन्होंने बताया कि कुछ समय बाद इस बात की शिकायत व्यवसायिक परीक्षा मंडल (VYAPAM) तक पहुंची। फिर मामला STF (स्पेशल टास्क फोर्स) तक आया। जांच में पता चला कि उसका मूल-निवासी प्रमाणपत्र नकली था और उसने इसी का उपयोग कर सरकारी फायदा लिया था। वर्तमान में आरोपी डॉ. सुनील सोनकर बीना में रहता है। जबकि, स्थायी निवास में रीवा का पता लिखा हुआ है।

4 धाराओं में चला केस, 3 साल की सजा न्यायालय ने आरोपी डॉक्टर सुनील को धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना), 468 (धोखाधड़ी हेतु जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) के तहत सजा सुनाई है। न्यायालय परिसर अरेरा हिल्स स्थित जिला अभियोजन कार्यालय से जारी सूचना के अनुसार आरोपी को अधिकतम 3 साल तक की सश्रम कैद और जुर्माने की सजा हुई है।

कोर्ट ने सुनाया यह फैसला

  • 420 धारा में 3 साल सश्रम जेल और 500 रुपए जुर्माना
  • 467 धारा में 3 साल सश्रम जेल और 500 रुपए जुर्माना
  • 468 धारा में 3 साल सश्रम जेल और 500 रुपए जुर्माना
  • 471 धारा में 2 साल सश्रम जेल और 500 रुपए जुर्माना

सरकार की तरफ से इन्होंने लड़ा केस

इस केस में सरकार की तरफ से STF भोपाल के विशेष लोक अभियोजक आकिल खान और सुधा विजय सिंह भदौरिया ने कोर्ट में पैरवी की। उन्होंने दस्तावेज और सबूतों के आधार पर साबित किया कि आरोपी ने सच में फर्जी प्रमाणपत्र का उपयोग किया था।

विशेष लोक अभियोजक आकिल खान ने कहा कि फर्जी दस्तावेज से सीट लेने से किसी योग्य छात्र का नुकसान होता है। सरकारी शिक्षा पर खर्च होने वाला पैसा भी बेकार जाता है और सिस्टम पर लोगों का भरोसा कम होता है। अब इस फैसले के बाद एक साफ संदेश गया है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी फायदा लेना अपराध है और इसकी सजा मिल सकती है, चाहे व्यक्ति डॉक्टर हो या किसी भी पद पर हो।

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