राजधानी में कांग्रेस की किसान महापंचायत में दांव उल्टा पड़ गया। किसानों की भीड़ तो उम्मीद के मुताबिक नहीं जुटी, लेकिन जो थोड़े-बहुत कार्यकर्ता पहुंचे थे, उन्होंने अपना सारा गुस्सा बेचारे पत्रकार पर निकाल दिया। मामला अब डीजीपी की दहलीज तक जा पहुंचा है।
भीड़ कम, गुस्सा ज्यादा
सूत्रों के मुताबिक हुआ यूं कि महापंचायत में जब कुर्सियां खाली दिखने लगीं और कार्यकर्ता उन्हें समेटने में जुट गए, तो एक निजी चैनल के पत्रकार नितिन ठाकुर ने अपना कैमरा ऑन कर दिया। बस, फिर क्या था सच्चाई कैमरे में कैद होते देख कुछ कार्यकर्ताओं का ब्लड प्रेशर हाई हो गया। उन्होंने पत्रकार को कवरेज करने से न सिर्फ रोका, बल्कि उनके साथ ऐसी अखाड़ेबाजी और बदसलूकी की कि मामला चर्चा का विषय बन गया।
रॉयल प्रेस क्लब का एक्शन
पत्रकारों के हक की लड़ाई लड़ने वाले रॉयल प्रेस क्लब ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। संयुक्त सचिव अंकित पचौरी ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर भीड़ नहीं आई तो इसमें पत्रकार का क्या कसूर? उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर मांग की है कि कैमरा देखकर बिदकने वाले इन सूरमाओं की पहचान की जाए। लोकतंत्र में कलम और कैमरे को डराने वालों पर कानूनी डंडा चले।
सोशल मीडिया पर चटखारे
शहर के गलियारों में चर्चा है कि अगर कार्यकर्ता कुर्सियां समेटने की जगह जोश दिखाने में इतनी मेहनत करते, तो शायद महापंचायत की तस्वीर कुछ और ही होती। फिलहाल, पुलिस अब उन गुस्सैल चेहरों की तलाश कर रही है जिन्होंने कवरेज में रोड़ा अटकाया था।




