ग्वालियर । रामकृष्ण मिशन आश्रम से हुई ₹2.53 करोड़ की चर्चित साइबर ठगी के मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है। इस मामले के आरोपी गुरजीत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा आरोपी पर लगाई गई ₹15.19 लाख जमा करने की शर्त पर फिलहाल रोक लगा दी है।

क्या है पूरा विवाद?
इससे पहले हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को गुरजीत सिंह को सशर्त जमानत दी थी। तब आरोपी ने स्वीकार किया था कि उसके खाते में ₹15.19 लाख आए हैं और वह इसे जमा करने को तैयार है। हालांकि, अब आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उसके खाते में मात्र ₹2.89 लाख ही आए थे। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डिजिटल अरेस्ट कर लूटे थे ₹2.53 करोड़
यह मामला ग्वालियर की सबसे बड़ी साइबर ठगी में से एक है। 17 मार्च को आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कॉल किया गया था। उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने का डर दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया और जांच के नाम पर अलग-अलग खातों में ₹2,52,99,000 ट्रांसफर करा लिए गए।
अब तक 19 गिरफ्तारियाँ
पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक देशभर से 19 आरोपियों को दबोच चुकी है, जिनमें बैंक मैनेजर और कैशियर भी शामिल हैं। हाल ही में हरदा से भी एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है। मुख्य आरोपी गुरजीत सिंह फिलहाल जेल में ही बंद है।
यह मामला दर्शाता है कि साइबर ठग कितने शातिर तरीके से प्रतिष्ठित संस्थानों को निशाना बना रहे हैं। कानूनी बारीकियों के बीच मुख्य आरोपी का जेल से बाहर आना अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिका है।




