भोपाल। राजधानी स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में बच्चों के खाने (मेस भुगतान) के नाम पर 1 करोड़ 55 लाख 49 हजार 498 रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने मामले में जालसाजी के मास्टरमाइंड, फर्जी फर्म संचालक और स्कूल के तत्कालीन प्राचार्यों समेत 7 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
ऐसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम
जांच के अनुसार, वर्ष 2021 में ‘कलका फूड मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ को भोपाल और इंदौर श्रमोदय विद्यालय में मेस संचालन का ठेका मिला था। कंपनी का असली खाता बैंक ऑफ बड़ौदा, गोवा में था।
वर्ष 2023 में कंपनी के सुपरवाइजर गौरव शर्मा ने जालसाजी की साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द हटाकर ‘कलका फूड मैनेजमेंट सर्विसेज’ नाम की एक फर्जी फर्म अपने परिचित हर्ष सरजानी के नाम पर बनाई। इसका खाता इंदौर के एक निजी बैंक में खुलवाया गया।
- मिलीभगत से बदला खाता: जून 2024 में एक फर्जी लेटरहेड देकर स्कूल की तत्कालीन अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा से सांठगांठ कर बैंक खाता बदलवा दिया गया।
- अधिकारियों की लापरवाही: नोटशीट पर असली कंपनी का नाम लिखा जाता था, लेकिन चेक काटते समय जानबूझकर ‘प्राइवेट लिमिटेड’ हटाकर राशि फर्जी खाते में ट्रांसफर कर दी जाती रही। तत्कालीन प्राचार्यों ने भी आंखें मूंदकर इन फर्जी चेकों पर हस्ताक्षर किए।
- एडवांस में खेल: चौंकाने वाली बात यह है कि खाता बदलने का पत्र जून 2024 में दिया गया, जबकि फर्जी खाते में पहला भुगतान अक्टूबर 2023 में ही कर दिया गया था।
नए प्राचार्य ने पकड़ा था मामला
इस पूरे खेल का पर्दाफाश फरवरी 2025 में तब हुआ जब नए प्राचार्य प्रदीप राजावत ने इस गड़बड़ी को पकड़ा। उन्होंने खुद चेक पर ‘प्रा. लि.’ जोड़कर असली कंपनी को भुगतान कराया। हालांकि, उनके तबादले के बाद आरोपियों ने फिर से फर्जी खाते में पैसा भेजना शुरू कर दिया।
इन पर दर्ज हुआ मुकदमा
EOW ने मास्टरमाइंड गौरव शर्मा, हर्ष सरजानी, कर्मचारी कुलदीप शुक्ला, तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोदिया, संतोष सिंह सिसोदिया, वीरेन्द्र दुबे और तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।




