मध्य प्रदेश की बहुचर्चित केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित पन्ना और छतरपुर जिलों के किसानों और आदिवासियों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। गुरुवार को दोनों जिलों से पहुंचे 20 किसान प्रतिनिधियों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की। इस दौरान किसानों ने विस्थापन, मुआवजे और भ्रष्टाचार के आरोप रखते हुए अपनी समस्याएं साझा कीं।
संसद में उठाएंगे मुद्दा: राहुल गांधी
किसान प्रतिनिधियों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वे इस गंभीर मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाएंगे। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए न्यायपूर्ण मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि दमन का। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
इस मुलाकात में छतरपुर से 11 और पन्ना से 9 किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। किसानों ने केन-बेतवा परियोजना के अलावा पन्ना की मझगवां बांध और रुंझ परियोजना में हो रही गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के मुद्दे भी राहुल गांधी के सामने रखे।
छतरपुर के 24 गांवों पर संकट
केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण छतरपुर जिले के 24 गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं:
- 8 गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं।
- 16 गांव पन्ना टाइगर रिजर्व के दायरे में शामिल किए जाने हैं।
ग्रामीण विकसित क्षेत्रों में भूखंड और 5 लाख रुपये अतिरिक्त सहायता की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन 12.50 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कह रहा है। मुआवजा और पुनर्वास को लेकर लंबे समय से गतिरोध बना हुआ है।
पानी में ‘चिता आंदोलन’ से लेकर ‘चूल्हाबंदी’ तक
स्थानीय ग्रामीणों ने इसके विरोध में अनोखा ‘चिता आंदोलन’ (पानी के अंदर बैठकर विरोध) किया था। बीते 20 जुलाई को भारी पुलिस बल ने कूपी गांव के बराना नदी घाट से आंदोलनकारियों को हटा दिया था। इसके बाद से ग्रामीणों ने ‘चूल्हाबंदी आंदोलन’ शुरू कर दिया है।
किसानों ने मांग की है कि विस्थापन की प्रक्रिया से पहले पुनर्वास स्थल पूरी तरह विकसित किए जाएं। राहुल गांधी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि कांग्रेस पार्टी प्रभावित परिवारों के संघर्ष में उनके साथ खड़ी है।



