भोपाल: शहर की इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी में बीते शुक्रवार को हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद से 300 से अधिक लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावितों ने मंगलवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
आश्वासन मिला, पर मिला मलबे का ढेर
रहवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने पक्के पट्टे होने के बावजूद उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए बेघर कर दिया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि नया आवास मिलने के बाद ही मकान तोड़े जाएंगे, लेकिन अचानक की गई कार्रवाई में 55 मकान और 70 दुकानें मलबे में तब्दील हो गईं।
“तीन दिन से चूल्हा नहीं जला”
पीड़ित सरोज मेहरा ने बताया कि उनके पास अब न घर बचा है और न ही आजीविका का साधन। उन्होंने कहा, “तीन दिन से बच्चों ने खाना नहीं खाया है। गहने, राशन और गृहस्थी का सारा सामान मलबे में दब गया है।” वहीं, ज्योति यादव ने अपने बीमार पति और छोटी बेटी की दुर्दशा बयां करते हुए कहा कि बारिश के इस मौसम में उनके पास सिर छिपाने की जगह भी नहीं है।
प्रशासन से पुनर्वास की मांग
प्रभावितों ने महापौर और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन्हें तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फ्लैट और दुकानें आवंटित की जाएं। साथ ही, जब तक स्थायी पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक उनके लिए अस्थायी आवास, भोजन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
फिलहाल, बेघर हुए परिवारों का संघर्ष जारी है और वे प्रशासन के ठोस कदम का इंतजार कर रहे हैं।





