भोपाल: मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखक नियाज खान अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फिर चर्चा में हैं। उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक विवादास्पद पोस्ट साझा करते हुए सुझाव दिया है कि भारत में मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हिंसा) की घटनाओं से बचने के लिए मुस्लिमों को अपना पहनावा बदलकर तुर्की के मुसलमानों जैसा अपना लेना चाहिए।
पहचान छिपाने पर दिया जोर
नियाज खान ने तर्क दिया कि देश में मॉब लिंचिंग के अधिकांश मामलों में पीड़ित पारंपरिक कुर्ता-पायजामा, टोपी पहने या दाढ़ी रखे होते हैं। उनका कहना है कि इस तरह के हुलिए से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है, जिससे वे निशाना बनते हैं। इसी पहचान को छिपाने के लिए उन्होंने पहनावा बदलने की सलाह दी है।
लोकतंत्र और राजनीति पर भी उठाए सवाल
अपनी अन्य पोस्ट में उन्होंने लोकतंत्र पर निशाना साधते हुए कहा कि कई देशों ने लोकतांत्रिक ढांचा तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांतों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज नेता और अफसर लोकतंत्र की आड़ में जनता का पैसा लूट रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी अपील की कि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को रोकने के लिए ईमानदार और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को सक्रिय राजनीति में आना चाहिए।




