भोपाल
शहर के आवासीय (रेसिडेंशियल) भवनों में चल रहे कमर्शियल उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में आज (बुधवार को) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे। इससे पहले मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर ढीली कार्रवाई को लेकर कई राज्यों के नगर निगमों को कड़ी फटकार लगाई थी।
भोपाल में क्या है पूरा घटनाक्रम:
- प्रशासनिक कार्रवाई और राहत: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने कई प्रतिष्ठानों को सील कर दिया था। इसके बाद रविवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उच्च स्तरीय बैठक में व्यापारियों को फिलहाल राहत देने का निर्णय लिया गया।
- समिति का गठन: मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की समीक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अध्ययन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति बनाई है। रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को राहत दी गई है, जिसके चलते सोमवार को दुकानें फिर से खुल गईं।
- रहवासियों का विरोध: दूसरी ओर, अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां समेत कई इलाकों के रहवासी संघ ने आवासीय परिसरों में कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था।
- व्यापारियों का पक्ष: भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (बीसीसीआई) ने मांग की है कि वर्ष 2005 के बाद से नया मास्टर प्लान लागू न होने के कारण व्यापारियों को व्यावसायिक भूखंड नहीं मिल पाए, जिस वजह से उन्हें मजबूरी में आवासीय परिसरों में दुकानें चलानी पड़ रही हैं। संगठन ने ‘मिक्स लैंड यूज’ की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।




