नई दिल्ली/भोपाल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘सागा ग्रुप’ के ठिकानों पर छापेमारी की है। एजेंसी की दिल्ली यूनिट ने मुंबई और भोपाल में ग्रुप के सीएमडी समीर अग्रवाल और उनके करीबियों के कई आवासीय व व्यावसायिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
छापेमारी में क्या मिला?
- नकदी व आभूषण: ₹1.53 करोड़ कैश, ₹35 लाख की विदेशी मुद्रा और ₹5.25 करोड़ के सोने-चांदी के गहने व बुलियन।
- निवेश व गाड़ियां: ₹30 करोड़ से अधिक के शेयर, म्यूचुअल फंड, बैंक डिपॉजिट, एलआईसी पॉलिसियां और 9 लग्जरी गाड़ियां जब्त व फ्रीज की गईं।
मुनाफे का लालच देकर ठगे 10,000 करोड़
जांच के अनुसार, सागा ग्रुप ने वर्ष 2009 से ‘लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिप्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी’ (LUCC) व अन्य समितियों के जरिए लोगों से पैसा जुटाया। निवेशकों को 3 से 5 साल में रकम दोगुनी-तिगुनी करने और लग्जरी कारें देने का झांसा दिया गया। बिना किसी ठोस कारोबार के फर्जी बैंकिंग ढांचे के जरिए जनता से ₹10,000 करोड़ से अधिक की ठगी की गई।
50 से ज्यादा फर्जी कंपनियों से मनी लॉन्ड्रिंग
एजेंसी ने बताया कि जनता से जुटाया गया कैश 50 से अधिक शेल (फर्जी) कंपनियों और हवाला नेटवर्क के जरिए भारत व विदेशों में अचल संपत्तियों में लगाया गया।
मुख्य आरोपी फरार, एक गिरफ्तार
ग्रुप का मुख्य कर्ताधर्ता समीर अग्रवाल देश छोड़कर फरार हो चुका है। वहीं, ग्रुप के अहम पदाधिकारी रवि शंकर तिवारी को PMLA कानून के तहत पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया गया है।




