भोपाल: सुप्रीम कोर्ट से भोपाल के 21 साल से पेंडिंग मास्टर प्लान को लेकर राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को हुई लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को नया मास्टर प्लान ड्राफ्ट जारी करने की अनुमति दे दी है, हालांकि इसका फाइनल प्रकाशन कोर्ट को सूचित करने के बाद ही किया जाएगा। शहर में पिछले 21 सालों से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है और फिलहाल 2005 के पुराने प्लान के आधार पर ही विकास कार्य हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में बरती जा रही लापरवाही और सील किए गए प्रतिष्ठानों के शाम को दोबारा खुलने की शिकायतों पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि आगे से ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सीलिंग मामले में अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी, जिसमें नगर निगम और राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
गौरतलब है कि अगस्त महीने में आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कमर्शियल प्रतिष्ठानों पर निगम ने शिकंजा कसा था, जिसके तहत हजारों नोटिस जारी किए गए थे और कुछ दुकानें सील भी की गई थीं। हालांकि, व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। दूसरी ओर, रहवासियों लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि आवासीय इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों के कारण शोर, भारी ट्रैफिक, असामाजिक तत्वों का दखल और बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर खतरे पैदा हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इन सख्त आदेशों के बाद अब प्रशासन और नगर निगम पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव काफी बढ़ गया है।




