भोपाल:
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भोपाल की लाइफलाइन बड़े तालाब (अपर लेक) में सिंघाड़े की खेती और पानी की गुणवत्ता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर को लिए गए पानी के नमूनों में कीटनाशक और भारी धातुएं नहीं पाई गईं तथा घुलित ऑक्सीजन (DO) 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई। हालांकि, मत्स्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अपर लेक में सिंघाड़े की खेती के लिए विभाग द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है।
एनजीटी के मुख्य निर्देश:
- खेती का नियमन: भोपाल नगर निगम और कृषि विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि तालाब में सिंघाड़े की खेती पर्यावरणीय सुरक्षा नियमों के अनुरूप ही हो।
- सिंघाड़े की जांच: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को निर्देश दिए गए हैं कि वह तीन महीने के भीतर सिंघाड़े में कीटनाशक अवशेषों और हानिकारक रसायनों की जांच पूरी करें।
- जैविक खेती को बढ़ावा: मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम मिलकर जैविक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक कीटनाशकों के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
- जल की नियमित जांच: एहतियाती उपाय के रूप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बड़े तालाब के पानी की नियमित निगरानी और जांच की जाएगी।




