बैतूल: जिले के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में डेढ़ करोड़ रुपए के बड़े बैंकिंग फ्रॉड का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड कोई शातिर अपराधी नहीं, बल्कि 15 साल का एक नाबालिग है। हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपियों ने कागजों में जिंदा लोगों को मृत बताकर उनकी एफडी तुड़वाकर पैसे हड़प लिए। बोरदेही पुलिस ने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
कियोस्क सेंटर चलाने वाला 15 वर्षीय नाबालिग बैंक में आता-जाता था और उसने भारी रकम जमा करने वाले खाताधारकों की जानकारी जुटा ली थी। इसके बाद उसने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लोकेश गोखे को अपने जाल में फंसाया और उसकी आईडी का इस्तेमाल कर जनवरी 2026 से अब तक कई बार खाताधारकों के मोबाइल नंबर बदले। आरोपियों ने नेट बैंकिंग के जरिए खाताधारकों की एफडी तुड़वाई और जिंदा लोगों को कागजों में मृत बताकर रकम उड़ा ली। ठगी की यह रकम नाबालिग के दोस्त और पेशे से टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती थी। अकेले गौरव के खाते में सवा करोड़ रुपए मिले हैं, जिसे पुलिस ने फ्रीज करा दिया है।
गिरोह का तरीका बेहद शातिर था क्योंकि यदि कोई खाताधारक पैसे कटने की शिकायत लेकर बैंक पहुंचता, तो आरोपी तुरंत उसके खाते में पैसे वापस जमा कर देते थे ताकि मामला पुलिस तक न पहुंचे। इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब 21 अक्टूबर को रिटायर्ड टीचर गेंदाराम सोनी ने अपने खाते से 7 लाख रुपए गायब होने की एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद अन्य खाताधारकों के साथ हुई धोखाधड़ी का भी खुलासा हुआ।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपए का सोना, 1.40 लाख रुपए की चांदी और 12 लाख रुपए की एक कार सहित कुल 22.33 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है। बैंक प्रबंधन ने गड़बड़ी सामने आने पर असिस्टेंट मैनेजर को निलंबित तो कर दिया था, लेकिन मामले को दबाने की कोशिश की गई। फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर अन्य खातों और संपत्तियों की जांच कर रही है।




