जबलपुर: कटनी की फरार चल रही सिटी एसपी (CSP) नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें अभी कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बुधवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर लंबी सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस राजकुमार चौबे की युगलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत की मांग पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बचाव पक्ष की दलील: सुनवाई के दौरान नेहा पच्चीसिया के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। बचाव पक्ष के अनुसार, जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी और क्षितिज राज पात्रे ने उसके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की थी। उनके बैंक खाते से इस सौदे में कोई भुगतान नहीं हुआ है और ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जो उनकी संलिप्तता साबित करे।
क्या है पूरा मामला: यह पूरा विवाद कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज धोखाधड़ी और हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि तय समय-सीमा में चालान पेश न होने के कारण हत्या के आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया था। इसके एवज में संबंधित आरोपियों की जमीन कम कीमत पर एक एजेंट के नाम पर खरीदे जाने का आरोप है। इस मामले में सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों पर केस दर्ज है और पुलिस उन पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर चुकी है।
एयर होस्टेस से पुलिस अधिकारी बनने का सफर: मूल रूप से राजगढ़ जिले की पचोर तहसील की रहने वाली नेहा पच्चीसिया ने पुलिस सेवा में आने से पहले एयर इंडिया में एयर होस्टेस के तौर पर काम किया था। उन्होंने 2012 की एमपीपीएससी (MPPSC) परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल की और 2016 में डीएसपी के रूप में पुलिस सेवा ज्वाइन की। मई 2025 में उनका तबादला कटनी बतौर शहर सीएसपी हुआ था। अब हाईकोर्ट के निर्णय से ही यह स्पष्ट होगा कि उन्हें एफआईआर और गिरफ्तारी से राहत मिलती है या नहीं।




