देश में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए बड़े पैमाने पर गैरकानूनी विदेशी लेनदेन का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शुरुआती जांच में 4,600 करोड़ रुपए से अधिक के अनधिकृत क्रिप्टो ट्रांसफर का खुलासा हुआ है। इस मामले में ईडी ने हाल ही में बेंगलुरु और मध्यप्रदेश में कई ठिकानों पर छापेमारी की है।
जांच में पता चला है कि कुछ फर्जी कंपनियां विदेशों में रजिस्टर्ड थीं, लेकिन असल में उनका संचालन भारत से ही किया जा रहा था। इन कंपनियों के कागजी पतों पर न तो कोई दफ्तर मिला और न ही कर्मचारी, फिर भी इनके जरिए बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा में लेनदेन किया जा रहा था।
बिना अनुमति चल रहा था अंतरराष्ट्रीय पेमेंट नेटवर्क बेंगलुरु की मेसर्स आरपीएफएस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद इस रैकेट का पर्दाफाश हुआ। यह कंपनी ‘मेट्रेस’ और ‘सेवर.मनी’ जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चला रही थी। आरोप है कि बिना किसी सरकारी अनुमति के इन प्लेटफॉर्म के जरिए यूएसडीटी (USDT) और यूएसडीसी (USDC) जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर अवैध रूप से सरहद पार पैसों का लेन-देन किया जा रहा था। इसके लिए बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था।
कनाडा, अमेरिका और सिंगापुर तक जुड़े हैं तार जांच एजेंसियों के मुताबिक, अवैध रकम को बाइनेंस और बायबिट जैसे विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म के जरिए कनाडा, लिथुआनिया और अमेरिका की शेल (फर्जी) कंपनियों तक पहुंचाया गया। इसके अलावा, एथेरियम ब्लॉकचेन पर आधारित ‘इंस्टाडैप’ (अब ‘फ्लुइड’) प्लेटफॉर्म की भी जांच की जा रही है। इसका संचालन भले ही अमेरिका और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की कंपनियों के नाम पर था, लेकिन इसकी असली विकास टीम और संस्थापक भारत से ही इसे ऑपरेट कर रहे थे। निवेशकों और कंपनी की भारी-भरकम कमाई को विदेशी वॉलेट में छुपाकर रखा गया था।
सिंगापुर के खातों से दुबई और भारत भेजे गए पैसे ईडी को यह भी पता चला है कि सिंगापुर के क्रिप्टो एक्सचेंजों पर डिजिटल करेंसी बेचकर जो पैसे मिले, उन्हें वहां की दो कंपनियों के खातों में जमा कराया गया। इन पैसों का एक हिस्सा सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी फीस के नाम पर भारत भेजा गया, जबकि कुछ रकम सिंगापुर के प्रीपेड कार्ड्स के जरिए भारत में खर्च की गई और कुछ पैसा संस्थापकों के दुबई स्थित बैंक खातों तक पहुंचाया गया। फिलहाल, ईडी इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।




