जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मप्र पब्लिक हेल्थ कॉर्पोरेशन के जरिए टेंडर जारी किए थे। प्रदेश के 18 जिला अस्पतालों में 16 स्लाइस सीटी स्कैन मशीनें लगाने का काम सिद्धार्थ सीटी स्कैन सर्विस जयपुर राजस्थान को मिला था। 10 जनवरी 2018 को हेल्थ कॉर्पोरेशन से कंपनी ने एग्रीमेंट किया था। चार साल बीतने के बाद भी कंपनी धार, रतलाम, शाजापुर और मंडला जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीनें नहीं लगा पाई। इसके बाद हेल्थ कॉर्पोरेशन ने कंपनी को नाेटिस जारी किए इसके बावजूद कंपनी शाजापुर और मंडला में सीटी स्कैन मशीनें नहीं लगा पाई। इस लापरवाही पर हेल्थ कॉर्पोरेशन ने कंपनी पर कार्रवाई करते हुए धरोहर राशि को जब्त कर पांच साल तक टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।कोरोना संकट काल में हुई मरीजों को परेशानीस्वास्थ्य विभाग द्वारा टेंडर जारी होने के बाद करीब डेढ़ साल के भीतर कंपनी को सीटी स्कैन मशीनें लगानी थीं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लंग्स में इन्फेक्शन लेवल जांचने के लिए सीटी स्कैन सबसे जरूरी टेस्ट था लेकिन कंपनी की लापरवाही से जिला अस्पतालों में यह सुविधा शुरू न होने से मरीजों को बाहर जांच करानी पड़ी।काम में देरी पर हर हफ्ते 50 हजार की पेनाल्टीहेल्थ कार्पोरेशन के अधिकारियों की मानें तो कंपनी को इन मशीनों को चालू करने का काम दो साल में पूरा करने की शर्त थी। काम में देरी होने पर हर हफ्ते 50 हजार की पेनाल्टी लगाने की शर्त रखी गई थी। चार साल में भी जब कंपनी मंडला और शाजापुर में मशीनें नहीं लगा पाई तो हेल्थ कॉर्पोरेशन ने सिक्योरिटी मनी जब्त कर पांच साल तक टेंडर में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित कर दिया। हालांकि जिन 16 जिलों में कंपनी की मशीनें चालू हो गई हैं वहां कोई असर नहीं पडे़गा।




