मध्यप्रदेश में बीते कुछ समय से जानवरों के इंसानों को काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। आंकड़ों की मानें तो सबसे खूंखार कुत्ते इंदौर के हैं। वे हर महीने लगभग 5 हजार लोगों को काट लेते हैं। वहीं सबसे हमलावर बिल्लियां दमोह में हैं। यहां सात दिन के नवजात को बिल्ली के उठा ले जाने की घटना भी सामने आ चुकी है। वहीं इंसानों के बीच आतंक मचाने के मामले में भिंड के बंदर सबसे आगे हैं। जबलपुर ऐसा शहर है जो तीनों ही मामलों में दूसरे नंबर पर है। यानी यहां कुत्ते, बिल्ली और बंदर तीनों ही हमलावर हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट में हुआ है।वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के रिटायर्ड SDO रमाकांत दीक्षित बताते हैं कि जानवर इंसानों की तरह प्रेम, नाराजगी जैसे भावों को भली प्रकार से समझते हैं। एनिमल बाइट के केसेज की सबसे बड़ी वजह इरिटेशन (खीझना) होती है। जानवरों की नाराजगी के कई कारण हो सकते हैं जैसे ज्यादा गर्मी, पानी और भोजन की कमी। जानवरों के प्रति स्थानीय रहवासियों का गलत व्यवहार भी एनिमल्स में इरिटेशन बढ़ा देता है। अलग-अलग जिलों में इनके इरिटेशन पर शोध किया जाना चाहिए, तभी सही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।जानवरों के काटने से रेबीज का खतराविशेषज्ञों की मानें तो कुत्ता, बिल्ली, बंदर, नेवला सहित कोई भी जानवर यदि किसी इंसान को काटता है, तो समय पर टीकाकरण न कराने पर रेबीज का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी का कहना है कि मप्र में रेबीज को संक्रामक बीमारी के तौर पर नोटिफाइड किया गया है। अब सरकारी और प्राइवेट हर अस्पताल में आने वाले एनिमल बाइट के मरीज की जानकारी आधिकारिक ऐप NRCP पर दर्ज करनी होगी। इससे मरीजों की ट्रैकिंग और वैक्सीनेशन में मदद मिलेगी।




