छतरपुर:
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा फैसला सामने आया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों के अप्रूवल के एवज में रिश्वत मांगने वाली तत्कालीन ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को कोर्ट ने 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। करीब छह साल चली लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
शौचालयों के फोटो अपलोड करने के मांगे थे पैसे
डपी प्रवेश अहिरवार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि फरियादी जितेंद्र सिंह छतरपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत धौरी में रोजगार सहायक के पद पर पदस्थ था। उसने स्वच्छता अभियान के तहत गांव में बने 13 शौचालयों की तस्वीरें ऑनलाइन एप पर अपलोड की थीं।
इन फोटो के अप्रूवल की जिम्मेदारी ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी के पास थी। आरोप है कि नीलम तिवारी ने प्रत्येक शौचालय के हिसाब से 500 रुपए की मांग की, जो कुल मिलाकर 6,500 रुपए बनती थी। रोजगार सहायक द्वारा रिश्वत देने से इनकार करने पर उसने अप्रूवल रोक दिया था।
लोकायुक्त ने रंगे हाथों किया था गिरफ्तार
परेशान होकर रोजगार सहायक जितेंद्र सिंह ने मामले की शिकायत सागर लोकायुक्त पुलिस से की। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर 18 फरवरी 2020 को नीलम तिवारी को 6,500 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया था।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मामला विशेष न्यायालय में चला। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी नीलम तिवारी को दोषी मानते हुए 3 साल की सजा सुनाई। हालांकि, कोर्ट से 3 साल की सजा होने के कारण आरोपी को तत्काल जमानत मिल गई है। नियमानुसार, इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान है। तय अवधि में अपील न किए जाने पर सजा भुगतनी होगी।



