जहां जो खेती बहुतायत में होती है उस पर फोकस रहेगा। इससे संबंधित दौरे भी आने वाले समय में करेंगे। जैसे मंडला, डिंडोरी, उमरिया में मिलेट्स की खेती की अधिकता के चलते इनमें से किसी जिले में सम्मेलन जाएं। इसी तरह सोयाबीन उत्पादक जिले के बेल्ट में भी इससे संबंधित सम्मेलन होंगे। धान और गेहूं जहां ज्यादा पैदा होता है वहां भी खेती को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलन किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को ये बातें कलेक्टरों के साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के दौरान कहीं। जिलों के कृषि अधिकारियों और कलेक्टरों से साथ कृषि वर्ष पर किए जाने वाले कामों को लेकर बैठक में कलेक्टरों से सीएम यादव ने यह भी कहा कि हार्टिकल्चर को भी बढ़ावा देना है।
उद्यानिकी सेक्टर में भी बहुत काम किए जा सकते हैं। जिस तरह से गुना में गुलाब की खेती तेजी से हो रही है और गुलाब के नाम से गुना की पहचान बन रही है, उसी तरह फलों और अन्य उद्यानिकी पौधों को भी बढ़ावा देकर अलग पहचान बनाना है।
सीएम ने कोदों कुटकी वाले जिले, उर्वरक के अधिक उपयोग वाले जिले और प्राकृतिक खेती में आगे बढ़ रहे जिलों के आधार पर कलेक्टरों को देकर समय पर कार्यक्रम पूरे कराने को कहा है।
सीएम यादव ने अफसरों को ये निर्देश भी दिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाए जाएंगे। इसके लिए अलग से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। जिलों में किसान रथ चलाए जाएं, जिनका शुभारंभ स्थानीय सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से कराया जाए।
किसानों से विभिन्न स्थानों पर निरंतर संवाद किया जाए। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों के उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
नरवाई जलाने पर सख्ती से अंकुश लगाएं
सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में पराली और नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाएं। प्रत्येक जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान तैयार किया जाए। खेतों से निकलने वाली पराली और भूसे का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। फसलों के अवशेष और गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए।
सभी कलेक्टर्स यह सुनिश्चित करें कि किसानों द्वारा खेतों से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं तक पहुंचाया जाए, जिससे गौवंश को लाभ मिल सके। साथ ही, जिलों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं।
डिंडोरी में कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम
मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। प्रत्येक नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि मछली विक्रेता निर्धारित फिश पार्लर या बाजार में ही मछली का विक्रय करें। पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नए-नए तरीकों और उपायों की जानकारी दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी का उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है।
मार्च में राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन
फरवरी के दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत किसानों के आईडी पंजीयन और किसान उन्मुखी योजनाओं के एग्रीस्टैक से एकीकरण के लिए निमाड़ क्षेत्र के किसी जिले में राज्यस्तरीय एग्रीस्टैक एवं डिजिटल कृषि प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसी माह के अंतिम सप्ताह में ‘कृषि मंथन’ के नाम से विभिन्न जिलों में दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मार्च माह में राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसके माध्यम से किसानों को नए कृषि ऋण प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, कृषक न्याय मित्र योजना के अंतर्गत किसानों को लाभान्वित किया जाएगा। इस सम्मेलन के जरिए जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के माध्यम से किसानों को डोर-स्टेप बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने की शुरुआत भी की जाएगी।




