मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनर्स ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मांगों की अनदेखी से नाराज विभिन्न संगठनों ने अजाक्स भवन में हुई बैठक में प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है।
अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनर्स संयुक्त मोर्चे के अध्यक्ष एमपी द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 25 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। नेताओं ने आरोप लगाया कि मंत्रालय स्तर पर उनकी समस्याओं पर कोई चर्चा नहीं हो रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
मुख्य मांगें:
- संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण और आउटसोर्स कर्मियों का वेतन भुगतान सीधे विभाग से हो।
- शिक्षकों की TET और CPCT परीक्षा तथा अनुकंपा नियुक्त कर्मचारियों की सेवा से जुड़े मुद्दे।
- मंत्रालय के समान अन्य विभागों में समयमान वेतनमान लागू करना।
- नगर निगम, नगरपालिका, स्वास्थ्य, राजस्व, शिक्षा और पुलिस विभाग के कर्मचारियों की लंबित समस्याएं।
आगे की रणनीति:
- चरणबद्ध बातचीत: पहले मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा को संयुक्त मांग-पत्र सौंपकर चर्चा की जाएगी।
- जिला और संभाग स्तर पर बैठकें: सुनवाई न होने पर संभागीय मुख्यालयों पर बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार तक मांगें पहुंचाई जाएंगी।
- हड़ताल का नोटिस: इसके बाद सरकार को विधिवत हड़ताल का नोटिस देकर आंदोलन का अगला चरण घोषित किया जाएगा।
बैठक में मुकेश मौर्य, एसबी सिंह, महेंद्र शर्मा, विजय मिश्रा, सतीश शर्मा सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
क्या सरकार इन कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते संज्ञान लेगी? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।



