राजधानी में हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर, बेसन, दूध, ब्रेड, लड्डू आदि को ताजा दिखाने के लिए उसमें खतरनाक तरह के केमिकल मिले रंगों की मिलावट धड़ल्ले से की जा रही है। इससे लोगों को कई प्रकार की बीमारियां होने का खतरा है। इसके बाद भी मिलावटखोरों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।वजह भी साफ है, दुकानों की संख्या 25 से 30 हजार होने के अनुपात में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास पर्याप्त अमला और संसाधन नहीं है। भोपाल की आबादी के हिसाब से 15 फूड इंस्पेक्टर होना चाहिए, जबकि 5 ही काम कर रहे हैं।इंस्पेक्टरों के कामकाज के निगरानी की जिम्मेदारी डेजिग्नेटेड ऑफिसर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के पास होना चाहिए, लेकिन यहां एक एसडीएम के हवाले हैं। हांलाकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पिछले एक साल में भोपाल के ऐसे 89 सैंपलों को अनसेफ श्रेणी में रखा है। इनके संचालकों के खिलाफ सीजीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कई मामलों में सजा भी हो चुकी है।




