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मंत्री संपतिया बोलीं, मैं बिल्कुल सही, सांच को आंच नहीं

पीएचई मंत्री संपतिया उइके ने कहा है कि वे बिल्कुल सही हैं, सांच को आंच नहीं…। जिस तरह से जांच करें, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मेरी सच्चाई मुख्यमंत्री बताएंगे। इसके बाद यह उनके विरुद्ध लगे आरोप और जांच का मामला कैबिनेट बैठक में भी उठा। इसके बाद डिप्टी सीएम राजेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा है कि अपने ही विभाग की मंत्री के खिलाफ जांच बैठाने वाले पीएचई विभाग के प्रमुख अभियंता के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। डिप्टी सीएम और लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र कुमार शुक्ल ने कहा कि इस मामले में सरकार निर्णय लेगी।

उन्होंने यह भी कहा है कि किसी आरोप के मामले में संज्ञान लेकर जांच कराने से प्रशासनिक कसावट की स्थिति बनती है लेकिन जरूरी यह है कि आरोप लगाने वाले को भी ध्यान में रखना चाहिए कि वह कितना गंभीर व्यक्ति है? शुक्ल ने कहा कि मंत्री की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है जो निंदनीय है।

पीएचई विभाग की मंत्री संपतिया उइके के द्वारा 1000 करोड़ रुपए के कमीशन लिए जाने के सवाल पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सबसे पहले यह देखना चाहिए कि आरोप लगाना वाला व्यक्ति कौन है? जिसने आरोप लगाया है उसके बारे में किसी को बताने की जरूरत नहीं है।

अनर्गल आरोप लगाने पर संज्ञान लेने पर प्रशासन में सख्ती आती है। कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान मीडिया के सवालों पर मंत्री शुक्ल ने कहा कि कीचड़ उछालकर किसी की छवि खराब करने वालों को प्रतिबंधित करना चाहिए। जो जरूरी कार्यवाही होगी, वह सब होगी। जो आरोप लगा है वह आधारहीन है। मंत्री की जांच के आदेश कौन दे सकता है, अगर उस तरह की कोई मिस्टेक हुई है तो कार्रवाई जरूर होगी। आधारहीन आरोप है ऐसी मंत्री पर आरोप लगाया है जिसका राजनीतिक बैकग्राउंड अच्छा है। लगन के साथ काम कर रही हैं। विधानसभा में बजट प्रस्ताव के दौरान सभी ने उन्हें बधाई दी है। आदिवासी मंत्री को टारगेट करना निंदनीय है और आधारहीन आरोप छवि खराब करने वाला है।

मंत्री संपतिया बोलीं, मैं बिल्कुल सही हूं. सांच को आंच नहीं…

मैं बिल्कुल सही हूं। सांच को आंच नहीं, जिस तरह से जांच करें, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। गरीब मजदूर वर्ग से आई हूं और जनता जनार्दन की सेवा कर रही हूं। जिस तरीके से प्रताड़ना की जा रही है, वह मुख्यमंत्री को पता है और मुख्यमंत्री इसका जवाब देंगे। इंजीनियरों पर लगे आरोपों पर कहा कि वे इसके लिए सबसे अलग से बात करेंगी और सारी जानकारी देंगी। हमारी सरकार भ्रष्टाचार मुक्त सरकार है। अगर किसी के विरुद्ध शिकायत हुई है तो उसकी जांच होती है और वही हुआ है। अपने विरुद्ध जांच के मामले में उन्होंने कहा कि वे इस मामले में कैबिनेट बैठक के दौरान सवाल करेंगी।

पीएचई के ईएनसी ने कराई है जांच

पीएचई विभाग की मंत्री संपतिया उइके के खिलाफ यह जांच उन्हीं के प्रमुख अभियंता ने बैठाई है। यह जांच प्रधानमंत्री को की गई शिकायत के बाद केंद्र सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद बैठाई गई। प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी मुख्य अभियंता पीएचई और परियोजना निदेशक मप्र जल निगम को इस मामले में पत्र लिखकर सात दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा था।

जांच निर्देश में ये बातें

  • जांच के लिए जो निर्देश दिए गए उसमें कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा राज्य के जल जीवन मिशन में दिए गए 30 हजार करोड़ के खर्च की जांच की जाना है।
  • इसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में विभागीय मंत्री तथा उनके लिए पैसा एकत्र करने वाले कार्यपालन यंत्री मंडला की संपत्तियों की जांच के लिए कहा गया है।

संयुक्त क्रांति पार्टी के समरीते ने की थी शिकायत

पूर्व विधायक और संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से 12 अप्रैल 2025 को यह शिकायत की थी। इसमें कहा गया कि एमपी में जल जीवन मिशन के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 30 हजार करोड़ में मंत्री संपतिया उइके ने एक हजार करोड़ रुपए कमीशन लिया है। शिकायत में पूर्व ईएनसी बीके सोनगरिया पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा अपने एकाउंटेंट महेंद्र खरे से कमीशन लिया है। यह राशि 2000 करोड़ है। इसी तरह पीआईयू, जल निगम के डायरेक्टर जनरल और अभियंताओं ने एक-एक हजार करोड़ का कमीशन लिया है। बैतूल के कार्यपालन यंत्री ने 150 करोड़ रुपए बिना काम कराए ही शासन के खाते से निकाल लिए हैं। यही स्थिति छिंदवाड़ा और बालाघाट की भी है।

मुख्य अभियंता मैकेनिकल द्वारा 2200 टेंडरों पर कार्य नहीं कराया गया और राशि का आहरण कर लिया गया। समरीते ने आरोप लगाया है कि सात हजार काम की पूर्णता के फर्जी प्रमाण पत्र भी एमपी से केंद्र सरकार को भेजे गए हैं जिसकी सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। यह घोटाला देश के बड़े घोटालों में निकलकर आएगा।

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