भोपाल में नई कलेक्टर गाइडलाइन दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी का विरोध मंगलवार को भी जारी रहा। क्रेडाई सदस्यों ने प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप, मंत्री कृष्णा गौर और विधायक भगवानदास सबनानी से मुलाकात की। कहा कि यह प्रस्ताव जनता पर बोझ डालेगा। इसलिए गाइडलाइन पर रोक लगाई जाए।
प्रभारी मंत्री काश्यप एवं जिला मूल्यांकन समिति के सदस्य सबनानी ने गाइडलाइन दरों की मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता, वर्षवार दरों और उपबंधों के क्लीन डेटा एक्सेस, स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति द्वारा विश्लेषण की मांग को उचित बताया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित कर समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया।
बैठक कर मंथन किया प्रभारी मंत्री और विधायक के साथ क्रेडाई सदस्यों ने बैठक की। इस दौरान गाइडलाइन दरों की समीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने पर सहमति जताई गई। साल 2005 से 2025 तक के गाइडलाइन डेटा को सार्वजनिक करने की मांग उचित मानी गई। गाइडलाइन दरों की अनियंत्रित वृद्धि के प्रभावों का विश्लेषण स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से कराने का सुझाव दिया गया। वहीं, वर्तमान वृद्धि की समीक्षा करने और लोकहितकारी समाधान निकालने पर सहमति बनी।

गाइडलाइन के विरोध में जनप्रतिनिधियों का समर्थन
- प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप: सुझावों को न्यायसंगत बताते हुए अधिकारियों को निर्देशित करने का आश्वासन दिया।
- मंत्री विश्वास सारंग: गाइडलाइन दरों में हुई वृद्धि से आमजन प्रभावित हो रहा है। मैं सुझाव आपत्तियों से सहमत हूं।
- मंत्री कृष्णा गौर: क्रेडाई और अन्य व्यापारी संगठनों को पूरी तरह से समर्थन का भरोसा दिया।
- विधायक भगवानदास सबनानी: प्रभारी मंत्री के साथ बैठक में शामिल होकर पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
- विधायक रामेश्वर शर्मा: बढ़ती गाइडलाइन दरें लोगों के लिए बोझ बन रही है। बाजार को प्रभावित कर रही हैं। मैं इस विषय को मजबूती से रखूंगा।
- यह मांग उठाई
- कलेक्टर गाइडलाइन दरों में वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- वर्ष 2019-20 (Pre-COVID) के स्तर पर दरों को वापस लाया जाए।
- कृषि भूमि सहित सभी अनावश्यक उपबंध समाप्त किए जाएं।
- तीन वर्ष तक किसी भी वृद्धि पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर गाइडलाइन दर निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
- जनता पर बोझ बढ़ाएगा- मीक क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा, गाइडलाइन दरों की असंतुलित वृद्धि न केवल शहरी विकास बल्कि आम नागरिकों, व्यापार और औद्योगिक विकास के लिए भी बाधक है। पारदर्शिता और संतुलन के बिना की गई बढ़ोतरी बाजार में अस्थिरता लाती है। निवेश को हतोत्साहित करती है और आवासीय व व्यवसायिक संपत्तियों को आमजन की पहुंच से बाहर कर देती है। प्रस्तावित गाइडलाइन जनता पर बेवजह बोझ बढ़ाएगा।




