बजरिया पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था जुए का बड़ा कारोबार, क्राइम ब्रांच के ‘फिल्मी’ छापे से खुली पोल
भोपाल। शहर के बजरिया थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी कथित ‘सेटिंग’ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय पुलिस की आंख में धूल झोंककर—या यूं कहें कि उनकी सरपरस्ती में—चल रहे एक बड़े जुए के फड़ पर रविवार देर रात क्राइम ब्रांच ने धावा बोला। यह कार्रवाई किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी, जिसने बजरिया पुलिस के खुफिया तंत्र की पोल खोल कर रख दी है। क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई में ड्रोन से निगरानी की गई और पुलिसकर्मियों ने मुख्य दरवाजे की जगह सीढ़ी लगाकर सीधे दूसरी मंजिल पर एंट्री मारी। यह पूरी रणनीति इसलिए बनाई गई थी ताकि जुआरियों को संभलने का मौका न मिले।
कौन है रूसी जुआरी, जिसके फड़ पर लगती थी रईसों की महफिल?
इस पूरे खेल का मुख्य सरगना रूसी नाम का कुख्यात जुआरी है। यह बजरिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है और भोपाल शहर का जाना-माना नाम है। इसके अड्डे पर बड़े-बड़े और रसूखदार लोग हार-जीत का दांव लगाने आते हैं। रूसी का आपराधिक इतिहास भी रहा है; इससे पहले उसने ईंटखेड़ी थाना क्षेत्र के दानिश स्टेशन पर फायरिंग की घटना को भी अंजाम दिलवाया था। सूत्रों की मानें तो रूसी ने बजरिया थाना पुलिस को पूरी तरह से सेट कर रखा था। यही कारण है कि थाने के इतने नजदीक बड़े पैमाने पर जुआ और क्रिकेट सट्टा चलने के बावजूद स्थानीय पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
रेलवे का टीसी और जुआरियों का ‘गॉडफादर’: फारुख दाद
इस पूरे नेक्सस में एक और बड़ा नाम सामने आया है—फारूक दाद उर्फ फारूक टीसी। जानकारी के मुताबिक, फारूक बजरिया क्षेत्र में ही रहता है और रेलवे में पदस्थ है। जुआरियों को संरक्षण देने के लिए वह शहर के रसूखदार लोगों और पुलिस महकमे में अपनी पैठ का इस्तेमाल करता है।
रूसी के इस जुए के फड़ की रखवाली का जिम्मा भी फारूक टीसी के ही पास था। जानकारी के अनुसार, जब रात 3 बजे हाजी मुस्तफा की चाल में छापा पड़ा, तो जो 17 लोग मौके से फरार हुए, उनमें यह रेलवे कर्मचारी फारूख दाद भी शामिल था।
क्राइम ब्रांच की बड़ी जब्ती, लेकिन मुख्य आरोपी फरार
करीब 30 पुलिसकर्मियों की टीम ने जब दूसरी मंजिल के टीन शेड के नीचे छापा मारा, तो वहां से 2.61 लाख रुपये नकद, 4 लग्जरी कारें, दो स्कूटी, एक बाइक और क्रिकेट सट्टा खिलाने का पैनल बरामद हुआ। हालांकि, रूसी खान और फारूख टीसी मौके से भागने में सफल रहे। पुलिस ने मौके से रूसी की मां फरीन, पिता शफीक खान, पत्नी महक, इलियास और नफीस समेत 5 लोगों को पकड़ा है।
बजरिया पुलिस के मुंह पर करारा तमाचा
यह पूरी कार्रवाई बजरिया थाना पुलिस के मुंह पर एक करारा तमाचा है। सवाल यह उठता है कि जो जुए का अड्डा थाने के इतने करीब चल रहा था, उसकी भनक स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं लगी? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई थीं?
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या पुलिस के उच्चाधिकारी बजरिया थाने के उन जिम्मेदारों पर गाज गिराते हैं, जिनकी शह पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था। इसके साथ ही, भोपाल रेल मंडल प्रशासन पर भी निगाहें टिकी हैं कि क्या वह ऐसे भ्रष्टाचारी और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले टीसी फारूक पर कोई सख्त विभागीय कार्रवाई करेगा, या फिर उसे भी रेलवे के रसूख के चलते अभयदान मिल जाएगा? भ्रष्ट तंत्र और अपराधियों के इस गठजोड़ का असली पर्दाफाश होना अभी बाकी है।




