भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग और प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को जिले भर में ‘स्कूल रेडीनेस मेला-2’ का आयोजन किया गया। भोपाल के सभी 73 सेक्टरों और 1,800 से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में 5 से 6 वर्ष के हजारों बच्चों का फिर से आकलन किया गया।
इस मेले का मुख्य उद्देश्य बच्चों की भाषा, संख्या ज्ञान, शारीरिक और सामाजिक कौशल में आई प्रगति को मापना था। अभिभावकों को बच्चों के ‘प्रगति रिपोर्ट कार्ड’ सौंपे गए, जिनमें पिछले एक माह में हुए सुधारों को दर्शाया गया है।
घर-घर तक पहुँचा ‘सीखने का अभियान’
पिछले एक महीने से चलाए जा रहे ‘माता सहभागिता अभियान’ ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। माताओं को प्रतिदिन व्हाट्सएप के जरिए ‘एक खेल, एक कहानी और एक कविता’ के वीडियो भेजे गए, जिन्हें उन्होंने घर पर बच्चों के साथ दोहराया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि जिन बच्चों को पहले रंग और अंक पहचानने में दिक्कत होती थी, वे अब आत्मविश्वास के साथ ये गतिविधियाँ कर रहे हैं।
पहली शिक्षिका बनीं माताएँ
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि अब माताएँ केवल दर्शकों की भूमिका में नहीं हैं, बल्कि वे अपने बच्चों की पहली शिक्षिका के रूप में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के स्टेट हेड सज्जन सिंह शेखावत ने कहा, “सफलता मेले में नहीं, बल्कि उन नई आदतों में है जो परिवारों ने घर पर सीखी हैं।”
विभाग अब इस अभियान की सफलता के बाद बच्चों के कक्षा-1 में सहज प्रवेश और उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस सफल मॉडल को जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।




