भोपाल:यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में सप्लाई होने वाले पेयजल को लेकर गंभीर खुलासा किया है। संगठनों का दावा है कि फैक्ट्री के आसपास की बस्तियों में नलों के जरिए सीवेज (मल) से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
मुख्य बिंदु:
- 70 प्रतिशत नमूने फेल: संगठनों द्वारा कराई गई जांच में 30 बस्तियों से लिए गए 63 पानी के नमूनों में से 70% (43 नमूने) में फीकल कोलीफॉर्म (मल वाले बैक्टीरिया) पाए गए हैं।
- बड़ा तालाब और कोलार का पानी भी प्रभावित: बड़ा तालाब से सप्लाई पानी के 90% और कोलार डैम के 25% नमूने भी जांच में दूषित मिले हैं।
- बढ़ रहीं बीमारियां: दूषित पानी पीने से दस्त, उल्टी और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी: संगठनों के अनुसार, अगस्त 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था बनाने का आदेश दिया था। 8 साल बीतने के बाद भी धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है।
गैस पीड़ित संगठनों (नवाब खान, रशीदा बी, बालकृष्ण नामदेव और रचना धींगरा) ने इंदौर के भागीरथपुरा जैसी किसी बड़ी घटना के होने से पहले जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल व सीवर लाइन का काम तुरंत पूरा करने की मांग की है।




