मियां, मैं क्या केह रिया हूं, जरा कान इधर लाओ। अपने भोपाल में वो स्पा सेंटर वाले चाचा-भतीजे इन दिनों फिर से मार्केट में भयंकर छाए हुए हैं। पत्रकारिता के नाम पे बट्टा लगाने वाले इन दोनों की कहानी एकदम एक नंबर है बावा।
सुनो तो… चाचा पहले प्रिंट मीडिया में रायता फैलाता था। फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उछल-कूद करने आ गया। पर वहां से भी ऐसी लात पड़ी कि सीधे बाहर गिरे। अभी मार्केट में एकदम गरमा-गरम कानाफूसी चल रही है कि तोतले की तरह बोलने वाले इस चाचा और इसके भतीजे ने मिलके एक स्पा सेंटर पे तगड़ी अड़ी डाल रखी है।
मियां, मजे की बात तो ये है कि पहले इसी तोतले चाचा ने नारायण-नारायण करके अपने ही भतीजे के खिलाफ व्हाट्सएप ग्रुपों में पोस्टें पेल दी थीं। पर अब क्या है, दोनों का फिर से गठबंधन हो गया है। भतीजा अपने तोतले चाचा को कोई खतरनाक मिसाइल समझ रिया है, पर असलियत में चाचा एकदम फुस्सी बम है, मियां।
और तो और, कानाफूसी ये भी है कि ये जो चाचा पहले नारायण-नारायण करता था ना, इसके ऑफिस की छत पे जुए की फड़ सजती थी। जहां क्राइम ब्रांच कुछ वक्त पहले छापा मार चुकी है।
खैर मियां, इन दोनों के लिए अभी इतना डोस काफी है। अगर इनकी तकलीफ इतने पर भी कम नहीं होती है, तो अगली बार पूरा लव ट्रायंगल खोल के रख दूंगा… वही भंवरे ने खिलाया फूल… वाला किस्सा। तो चचा, पिक्चर अभी बाकी है।
नोट: मियां, पहले ही साफ-साफ बता रिये हैं कि ये पूरी कानाफूसी सिर्फ और सिर्फ मजे और टाइमपास के लिए है। इसका असल जिंदगी से कोई लेना-देना नहीं है बावा । किसी भी जीते-जागते या ऊपर जा चुके इंसान से अगर ये कहानी मैच खा जाए, तो उसे सिर्फ एक इत्तेफाक समझना। अपना मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी की बेइज्जती करना बिल्कुल नहीं है। बाकी तो आप समझदार हो ही।



