राजधानी भोपाल में इन दिनों गजब का कमिश्नर सिस्टम चल रहा है। एक तरफ हमारे मुख्यमंत्री जी आज से ‘नशे से दूरी है जरूरी अभियान 2.0’ का फीता काट रहे हैं, तो दूसरी तरफ भोपाल के सिस्टम ने इस अभियान को इतनी गंभीरता से ले लिया है कि नशे को दूर जाने ही नहीं दे रहे, सब कुछ एकदम पास-पास ही उपलब्ध करा दिया है। पिछले साल डीजीपी कैलाश मकवाना जी ने भी जनता को नशे से बचाने की कसमें खाई थीं, लेकिन भोपाल की सड़कों पर उतरिए तो पता चलेगा कि कसमें खाने के लिए हैं और गांजा पीने के लिए।
इतवारा में गांजे का खुला व्यापार…
कहते हैं चिराग तले अंधेरा होता है, लेकिन भोपाल के इतवारा में तो पुलिस चौकी के सामने ही पूरी दिवाली मन रही है। यहां चौकी के ठीक सामने सरेआम गांजे की पुड़िया ऐसे बिक रही है, जैसे प्रसाद बंट रहा हो। अब इसे पुलिस की नाकामी कहें या सुविधा? आखिर जब नशे का सामान पुलिस की आंखों के ठीक सामने बिकेगा, तो सुरक्षा की पूरी गारंटी तो रहेगी ही। शायद सिस्टम सोच रहा है कि चौकी के पास बिकेगा तो कम से कम यह तो पता रहेगा कि कौन-कौन पी रहा है।
हेलमेट लगाओ, वरना चालान कटेगा… शराब भले रात भर पियो
हमारे पुलिस कमिश्नर साहब को भोपालियों के सिर की बड़ी चिंता है। हर चौराहे पर हेलमेट का ऐसा कड़ा पाठ पढ़ाया जाता है कि बिना हेलमेट वाला आदमी खुद को शहर का सबसे बड़ा मुजरिम समझने लगता है। लेकिन जो शराब माफिया रात भर शहर की रगों में नशा घोल रहा है, उसके लिए क्या? शायद पुलिस को लगता है कि शराब पीने वाले तो वैसे भी गिरते-पड़ते घर पहुंच ही जाते हैं, उन्हें कौन सी चोट लगनी है।
आम जनता के लिए 11:30 बजे सायरन, शराब दुकानों पर मेहरबानी
पुलिस कमिश्नर सिस्टम में नियमों का दोहरा मापदंड साफ नजर आ रहा है। रात के 11:30 बजते ही पुलिस की गाड़ियां सड़कों पर सायरन बजाते हुए निकल पड़ती हैं। आम व्यापारियों, चाय-पान की गुमटियों और शरीफ नागरिकों की दुकानें डंडे के जोर पर बंद करवा दी जाती हैं। लेकिन, शहर में शराब की दुकानों के लिए मानो कोई कानून ही नहीं है।
शराब दुकानों के शटर भले ही गिर जाएं, लेकिन वहां मौजूद गार्ड खुद अपने मुंह से कुबूल कर रहे हैं कि शराब सुबह 8:00 बजे तक मिलती है। रात भर शराब का यह अवैध कारोबार बिना किसी खौफ के चलता रहता है। सायरन बजाने वाली पुलिस की गाड़ियां क्या इन शराब दुकानों के सामने से नहीं गुजरतीं? या वहां पहुंचते ही सायरन की आवाज और पुलिस की आंखें दोनों बंद हो जाती हैं ?



