भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव का विरोध अब तेज हो गया है। भोपाल मध्य के विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर विश्वविद्यालय का नाम न बदलने की मांग की है।
इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप
विधायक मसूद ने कार्य परिषद के उस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के योगदान को कमतर आंका गया था। मसूद ने कहा कि 38 साल पुरानी इस प्रतिष्ठित संस्था की पहचान मिटाना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार को ‘वाग्देवी भोजपाल’ के नाम से कोई संस्था शुरू करनी है, तो नई यूनिवर्सिटी बनाकर उसका नाम रखें, लेकिन मौजूदा विश्वविद्यालय का नाम न बदलें।
महान स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान सर्वोपरि
ज्ञापन में मौलाना बरकतउल्ला के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए मसूद ने कहा:
- वे गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे।
- 1915 में काबुल में बनी भारत की पहली निर्वासित अंतरिम सरकार में उन्हें प्रधानमंत्री बनाया गया था।
- उन्होंने देश की आजादी के लिए लेनिन तक से समर्थन मांगा था।
विधायक ने इसे एक महान देशभक्त का अपमान बताते हुए राज्यपाल से इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को तत्काल रोकने की मांग की है।




