भोपाल । राजधानी भोपाल के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सफर करना अब खतरे से खाली नहीं रह गया है। रेलवे स्टेशनों पर गुंडागर्दी और अवैध वेंडरों का सिंडिकेट इस हद तक हावी हो चुका है कि अब वे चलती ट्रेनों में घुसकर खुलेआम जानलेवा हमले करने लगे हैं। ऐसा ही एक खौफनाक मामला गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस में सामने आया है, जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था (जीआरपी और आरपीएफ) के तमाम दावों की पोल खोल कर रख दी है। अवैध रूप से खाना बेचने वाले बदमाशों ने ट्रेन की पैंट्री कार के कर्मचारियों पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस खूनी खेल के बाद पूरी ट्रेन में भारी हड़कंप मच गया और यात्री दहशत में आ गए।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना निशातपुरा और बैरागढ़ स्टेशन के बीच की है। गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस जैसे ही इस रूट से गुजर रही थी, तभी ट्रेन में अवैध वेंडरिंग करने वाले और अपना खुद का अवैध किचन चलाने वाले दो कुख्यात बदमाश— जितेंद्र खटीक और अंकित सुपारी, हथियारों के साथ ट्रेन में चढ़ गए।
इन दोनों बदमाशों ने सीधे पैंट्री कार का रुख किया और वहां काम कर रहे लड़कों पर गालियां देते हुए चाकुओं से हमला बोल दिया। अचानक हुए इस जानलेवा हमले से पैंट्री कार में चीख-पुकार मच गई। बदमाशों ने कर्मचारियों को बेरहमी से लहूलुहान कर दिया और मौके से फरार हो गए।
खाना खरीदने का बना रहे थे दबाव
आखिर इस खूनी संघर्ष की वजह क्या थी? पैंट्री कार में सेवाएं देने वाली कंपनी के मैनेजर राधा रमन शर्मा ने बताया कि यह कोई अचानक हुआ विवाद नहीं था, बल्कि सोची-समझी साजिश थी।
शर्मा के मुताबिक, आरोपी जितेंद्र खटीक और अंकित सुपारी रेलवे स्टेशन के आस-पास अपना अवैध किचन चलाते हैं। ये लोग लंबे समय से पैंट्री कार के वेंडरों पर दबाव बना रहे थे कि वे अपना खाना छोड़कर इन बदमाशों के अवैध किचन से बना हुआ खाना खरीदें और उसे ट्रेन में बेचें।
मैनेजर ने बताया, “एक दिन पहले ही इन दोनों आरोपियों (जितेंद्र और अंकित) ने हमारे लड़कों के साथ विवाद किया था। उन्होंने खुलेआम धमकी दी थी कि अगर उनका खाना नहीं लिया गया, तो वे किसी भी वेंडर को ट्रेन में चढ़ने नहीं देंगे। लड़कों ने जब उनकी बात मानने से इंकार कर दिया, तो उन्होंने आज इस खूनी वारदात को अंजाम दे दिया।”
हमले में तीन गंभीर, एक की हालत नाजुक
चाकुओं के इस बर्बर हमले में पैंट्री कार के तीन कर्मचारी बुरी तरह घायल हुए हैं। खून से लथपथ कर्मचारियों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
- विजय कुमार (42 वर्ष): इनके शरीर पर चाकुओं के कई गहरे घाव लगे हैं। डॉक्टरों के अनुसार बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण विजय की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वे जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
- आनंद कुमार (32 वर्ष): हमले में आनंद को भी गंभीर चोटें आई हैं।
- किशन (22 वर्ष): सबसे युवा कर्मचारी किशन को भी बदमाशों ने नहीं बख्शा और उसे भी चाकुओं से बुरी तरह घायल कर दिया।
- रेलवे की सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सिर्फ दो गुटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि रेलवे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का जीता-जागता सबूत है।
- अवैध वेंडरों की हिम्मत: बिना पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत के कोई भी अवैध वेंडर स्टेशनों पर धड़ल्ले से अपना किचन नहीं चला सकता और न ही चलती ट्रेन में हथियारों के साथ घुस सकता है।
- यात्रियों की सुरक्षा: अगर ट्रेन के अंदर काम करने वाले अधिकृत कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
- खुफिया तंत्र की विफलता: जब एक दिन पहले ही धमकी दी गई थी, तो जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) क्या कर रही थी?
रेलवे प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करनी चाहिए। अगर इस अवैध सिंडिकेट को जड़ से नहीं उखाड़ा गया, तो वह दिन दूर नहीं जब ट्रेनों में सफर करना किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा। घायलों के परिवार अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं और रेलवे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।



