खंडवा। महिला बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में है। हरसूद ब्लॉक के ग्राम शिवरिया में हुई भर्ती पर आवेदिका लक्ष्मी सोनेर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत कर आरोप लगाया है कि रिश्वत के दम पर मेरिट सूची में धांधली की गई और उनके हक के अंक काट दिए गए।
आरोप: रिश्वत देकर बदली गई रैंक
आवेदिका के पति और भाजपा नेता निखिलेश गार्वे का आरोप है कि सीडीपीओ गोपाल मोरे और बाबू नरेंद्र कनाड़े ने मिलीभगत कर धांधली की है। उन्होंने दावा किया कि उनसे 50 हजार रुपये की मांग की गई, जबकि दूसरी चयनित महिला उम्मीदवार से 3 लाख रुपये लेकर उन्हें नौकरी दी गई। शिकायत में डीपीओ रत्ना शर्मा का नाम भी लिया गया है।
अंकों में खेल: पहला स्थान चौथे पर धकेला
लक्ष्मी सोनेर के मुताबिक, ऑफलाइन प्रारंभिक सूची में उन्हें 60 अंकों के साथ पहला स्थान मिला था। लेकिन 18 मार्च 2026 को जारी ऑनलाइन मेरिट सूची में उनके अंक घटाकर 45 कर दिए गए। आरोप है कि उनके बीपीएल श्रेणी के 5 अंक और 5 साल के कार्य अनुभव के 10 अंक जानबूझकर नहीं जोड़े गए, जिससे वे रेस से बाहर हो गईं।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले पर हरसूद के सीडीपीओ गोपाल मोरे ने आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता के पास जो अनुभव प्रमाण पत्र था, वह नियमों के तहत मान्य नहीं है। भर्ती में केवल आंगनवाड़ी सहायिका या आशा कार्यकर्ता का अनुभव ही जुड़ता है। मुझ पर लगे रिश्वत के आरोप झूठे और निराधार हैं, यदि यह साबित नहीं हुए तो मैं मानहानि का दावा करूँगा।”
फिलहाल, इस मामले ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गरमाहट बढ़ा दी है। देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।



