और मियां। अपने शहर के मीडिया सर्कल में आजकल एक इंस्टाग्रामी पत्रकार भोत पेल के उड़ रिया है। जेब में अखबार का आईडी कार्ड रखा है, पर असल धंधा इंस्टा पर नंबर बनाने का चल रिया है। जिसका आईडी कार्ड है उससे पत्रकारिता ही नहीं हो रही। बल्कि वहां नंबर वाला इंस्टा चैनल आ जाता है। प्रेस वार्ता हो या सरकारी जलसा, ये मियां अफसरों पर ऐसे चढ़कर सवाल दागेंगे, जैसे रजत शर्मा या रवीश कुमार के इकलौते वारिस हों। बात-बात पर मोबाइल निकालकर अफसरों को फॉलोअर्स की गिनती ऐसे दिखाते हैं, मानो शहर की पूरी अवाम इन्हीं की जेब में बैठी हो।
सच्चाई तो ये है खां, कि इन मियां को पत्रकारिता का प भी नईं मालूम। अरे मियां। असली पत्रकारिता जमीन की खाक छानकर सच को सामने लाना है, कोई फिल्टर लगा के फॉलोअर्स की धौंस जमाना थोड़ी है।
लेकिन ओवर-स्मार्ट बनने और लंबी-लंबी फेंकने की खुजली ऐसी है कि जब ये जनाब जेल की हवा खाने पहुंचे, तो वहां भी तेवर नईं सुधरे। जेल सुपरिटेंडेंट के सामने भी इनकी भयंकर एक्शन बाजी और फेंका-फेंकी चालू थी। इन्हें देखकर बस एक ही कहावत याद आती है- गंजे को नाखून मिल जाएं, तो वो खुजा-खुजा के ही जख्म कर लेता है।
खैर, इस स्वघोषित तोपची के लिए आज इत्ता डोज भोत है। वक्त रहते मियां सुधरे नईं, तो अगले अंक में इनकी चप्पल की दुकान और चाय की टपरी का पूरा रायता यहीं फैलाएंगे। तो मियां, सुड़ुक के चाय पीओ, पिक्चर अभी बाकी है।
और मियां। इंस्टा वाले नंबरदार के बाद अब बारी है शहर के उस स्पा सेंटर वाले नारद की, नारद की अपनी लंका तब लगी, जब पुलिस ने इसी के ऑफिस की छत से जुए का पूरा फड़ धर दबोचा।
कान खुले रखना मियां, धमाका भोत जोरदार होगा।



